बाजार कुछ दिन और बेरुख Print E-mail

चेतन शर्मा, सलाहकार संपादक, ज़ी बिजनेस

बहुत प्यार करते हैं
शेयर बाजार को हम
कसम चाहे ले लो
खुदा की कसम

तुम्हारी चाल से है मुनाफा हमारा
तुम्हारे बिना है जीना ना गवारा
सागर की बाहों में
हैं मौजें जितनी
बाजार की लहरों में
हैं खुशियाँ उतनी
बाजार को यूँ ही चाहेंगे
जब तक है दम
बस पूँजी हमारी
कभी ना हो कम
और अमेरिका में तो काम से ही
मिल रहा है बाजार को दम
चूँकि बेरोजगारी भत्ता माँगने वाले
हो गये हैं कम
ज्यादा बिक्री, ज्यादा उत्पाद से भी
चल रहा है बाजार
बस डॉलर के मजबूत होने से
शेयर गिरे हैं दो-चार
लेकिन यहाँ घर और गाड़ी
के कर्ज पर ब्याज बढ़ेगा
हेविट का सर्वेक्षण कहता है
सबका वेतन भी अब बढ़ेगा
लेकिन बाजार नहीं हॉकी का खेल
या कृपालु का आश्रम
जहाँ अंत में बस मिलता है गम
दायरे में फँसा बाजार
अब क्या कहेगा
लगता है कुछ दिन
और बेरुख रहेगा
(शेयर मंथन, 05 मार्च 2010)

Last Updated ( Friday, 05 March 2010 08:23 )
 

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