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इस समय बाजार में कुछ नयी उम्मीदें दिख रही हैं और यह कहना मुश्किल है कि यह चाल इन स्तरों पर पूरी हो गयी है।
बाजार कुछ समय के लिए फिर से एक दायरे में भले ही रुक जाये, लेकिन इसने अपनी चाल पूरी हो जाने का संकेत नहीं दिया है। बाजार में अभी विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का जिस बड़े स्तर पर निवेश आ रहा है, उसने बाजार का रुख बदल दिया है। अब यह बढ़त पर बिकवाली का बाजार नहीं रह गया है। अब गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने का समय है। अनुभवी लोग जानते हैं कि अच्छे बाजार में निवेशकों के मन में लगातार इस बात को लेकर शक बना रहता है कि बाजार इतना ऊपर आ चुका है और कहीं नया निवेश करके हम ऊपरी स्तर पर फँस न जायें। इस शक की वजह से लोग तेजी में हिस्सा नहीं ले पाते और इसी शक के बीच बाजार ऊपर चढ़ता रहता है। बाजार में आम निवेशकों की धारणा कुछ बदली है, लेकिन अब भी वे एकदिनी कारोबार में कुछ दाँव लगाने तक सीमित हैं। इन ऊपरी स्तरों पर खरीदारी को लेकर उनके मन में हिचक है, क्योंकि पिछली गिरावट में उठाया गया नुकसान उनके मन पर हावी है। यह बात सही है कि इतनी उछाल के बाद एकदम छोटी अवधि में बाजार की चाल का अनुमान लगाना मुश्किल है। अभी वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण घटनाएँ सामने हैं। अगर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बढ़त मिलती दिखे तो इससे बाजार को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल रणनीति यही होनी चाहिए कि अगर छोटी अवधि में बाजार कुछ नीचे आये, मसलन सेंसेक्स में करीब 300-400 अंक या निफ्टी में 100 अंक के आसपास की नरमी आये तो खरीदारी की जाये। मध्यम अवधि के लिहाज से अब भी बाजार में निवेश पर फायदे की गुंजाइश दिखती है। बुनियादी ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), पूँजीगत सामान (कैपिटल गुड्स), बिजली जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा सकता है। बिजली क्षेत्र के लिए कोयले की आपूर्ति सुधारने को लेकर सही दिशा में कदम उठाये गये हैं, जिसका फायदा इन कंपनियों को मिलेगा। गजेंद्र नागपाल, सीईओ, यूनिकॉन फाइनेंशियल (Gajendra Nagpal, CEO, Unicon Financial) (शेयर मंथन, 16 फरवरी 2012) |
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Last Updated ( Thursday, 16 February 2012 11:25 )
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