गजेंद्र नागपाल, सीईओ, यूनिकॉन फाइनेंशियल
भारतीय बाजार मुझे मजबूत नजर आ रहे हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी भी लगातार जारी है।
बाजार फिलहाल 30 महीनों की ऊँचाई पर है, लेकिन कोई अति-उत्साह (यूफोरिया) नजर नहीं आ रहा है। यही इस बाजार की बेहद सकारात्मक बात है। मेरे लिए यह बताना मुश्किल है कि निफ्टी ऊपर कहाँ तक जा सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि मुझे बाजार में किसी बड़ी गिरावट की आशंका नजर नहीं आ रही है। मैं निफ्टी को 5400 के नीचे जाता नहीं देख रहा। हालाँकि भारतीय शेयर बाजार अब सस्ता नहीं है। लेकिन कई क्षेत्रों में बढ़ोतरी की काफी गुंजाइश बाकी है। रियल एस्टेट क्षेत्र पर यूबीएस की जो रिपोर्ट आयी है, वह काफी सकारात्मक है। मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में नयी चाल आ सकती है। इंजीनियरिंग, बैंकिंग और ऑटो क्षेत्र में निवेश की काफी गुंजाइश है। कमोडिटी की कीमतें कम हो रही हैं। हालाँकि ऑटो शेयरों का मूल्यांकन काफी ज्यादा हो गया है। फिर भी ऑटो क्षेत्र में बढ़त की संभावनाएँ अभी बाकी हैं। यह सही है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार की मौजूदा तेजी में हिस्सेदारी नहीं कर रहा है। ऐसा लगता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज घरेलू से ज्यादा ग्लोबल शेयर हो गया है। जब तक विदेशों में पेट्रो-रिफाइनिंग की स्थिति में सुधार नहीं होगा, तब तक मुझे नहीं लगता कि रिलायंस में कोई बड़ी तेजी आयेगी। (शेयर मंथन, 10 अगस्त 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 10 August 2010 09:50 )
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