डी डी शर्मा, सीनियर वीपी (रिसर्च), आनंद राठी सिक्यो.
भारतीय शेयर बाजार में भी मार्च का ठंडापन चल रहा है, हालाँकि बाजार के रुझान को लेकर कोई दिक्कत नहीं है।
कारोबारी साल के अंत में घरेलू निवेशकों की खरीदारी कम हो जाती है, जिसके चलते ऐसी स्थिति बन जाती है। घरेलू निवेशक अपना सालाना हिसाब निपटाने में लगे रहते हैं, जिसके चलते कोई बड़ी खरीदारी नहीं आ पाती है। घरेलू संस्थागत निवेशक बजट के बाद से जो बिकवाली कर रहे हैं, उसके पीछे एनएमडीसी का इश्यू एक बड़ा कारण लग रहा है। इस इश्यू में निवेश के लिए वे पैसा जुटा रहे हैं। बजट के बाद की उनकी बिकवाली के पीछे मुझे कोई दूसरा कोई कारण नहीं दिखता, क्योंकि बजट में ऐसा कुछ नकारात्मक नहीं था और उसके बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) खरीदारी ही कर रहे हैं। मेरा मानना है कि अप्रैल के मध्य से बाजार में नयी चाल आ सकती है, जिसमें निफ्टी 5200 के ऊपर जा सकेगा। लेकिन मार्च में बाजार इन्हीं स्तरों पर जमने (कंसोलिडेशन) की कोशिश करेगा, क्योंकि जितनी खरीदारी आ रही है, उतनी ही बिकवाली भी उभर रही है। इधर कुछ छोटे इश्युओं में निवेशकों को फिर से लिस्टिंग पर फायदा मिलने लगा है। इसका कारण यह है कि बड़े इश्युओं का हाल देख कर छोटी कंपनियों ने अपने इश्यू में कीमत को कुछ सस्ता रखना ठीक समझा। इसके चलते इनमें आवेदन ज्यादा आये, और आवेदन ज्यादा आने पर लिस्टिंग में फायदा हो जाता है। (शेयर मंथन, 11 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Thursday, 11 March 2010 10:13 )
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