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मुझे भारतीय बाजार की स्थिति आगे भी अच्छी ही लग रही है, क्योंकि अभी कोई खास नकारात्मक बात नहीं दिख रही है।
बाजार में लोग थोड़े समय पहले तक कोई उम्मीद नहीं कर रहे थे और 35-40% नीचे के स्तरों की बात कर रहे थे। लेकिन बाजार में ऐसा ही होता है। और जब बाजार में अति-उत्साह बनता है तो लोग एकदम 35-40% ऊपर की बातें करने लगते हैं। खैर, अभी तो अति-उत्साह है ही नहीं, क्योंकि लोगों की उतनी सहभागिता ही नहीं हो पायी है। हालाँकि किसी कारण से कोई घबराहट वाली स्थिति बनी तो हाल की तलहटी यानी करीब 4500-4600 के स्तरों की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। लेकन मुझे लगता है कि नवंबर 2010 के बाद से जो कमजोरी चल रही थी, वह पूरी हो गयी है। आज जैसा माहौल है, उसके हिसाब से अब आपको ज्यादा नीचे के भाव वापस नहीं मिलेंगे। मैं नवंबर में बोल रहा था कि जिसे खरीदना है उसे खरीद लेना चाहिए। लेकिन लोग सोचेंगे कि जब तक ग्रीस का समाधान नहीं निकलता, तब तक बैठे रहना है। अरे भाई, जब समाधान हो जायेगा, तब आपको कहाँ नीचे का भाव मिलने वाला है? यहाँ निफ्टी 5200 के पास आ गया तो तकनीकी लोग बोल रहे हैं अब बाजार थोड़ा ठीक लग रहा है, वह भी केवल 200 अंक की बढ़त के लिए! बाजार में उतार-चढ़ाव तो चलता ही रहेगा, लेकिन मेरा मानना है कि इस साल के अंत तक बाजार पिछले शिखर के पास होगा और 2012-13 की पहली तिमाही तक हमें नये शिखर देखने को मिलेंगे। शर्त केवल यही है कि मानसून अच्छा रहना चाहिए। टेलीकॉम के 2जी घोटाले में पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से निवेश के माहौल पर कोई खास असर नहीं पड़ना है। अगर किसी को हिंदुस्तान में टेलीकॉम के अलावा कहीं और पैसा लगाना है तो उस पर क्या फर्क पड़ता है? इस फैसले का अच्छा ही असर होगा और विदेशी निवेशक कुछ सावधान होकर अपने घरेलू साझेदार का चुनाव करेंगे। गुल टेकचंदानी, निवेश सलाहकार (Gul Teckchandani, Investment Advisor) (शेयर मंथन, 03 फरवरी 2012) |
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Last Updated ( Friday, 03 February 2012 11:04 )
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