दायरे की तस्वीर नजर आती है Print E-mail

चेतन शर्मा, सलाहकार संपादक, जी बिजनेस

जिधर देखूँ बस दायरे की
तस्वीर नजर आती है
रुपया हो डॉव या निफ्टी
बस दायरे की जंजीर

नजर आती है
ऐसे में रात में
होती है उम्मीद
पर मायूसी का सवेरा है
ऐसा चलता रहा तो
भला किसका बसेरा है
मेरा था जो सब दे दिया
अब क्या मेरा है
हताश हो गये हो तुम
झेल कर इसे
अब क्या तेरा है
बिना देखे बिना जाने
सौदा बना दे जो
और सोचते हो
मुनाफा तुमसे जुदा ना हो
मेरी हर नीति बस
ख्वाबों की जागीर
नजर आती है
सोच है अच्छी
पर पिटी-पिटी हुई
तकदीर नजर आती है
जिधर देखूँ बस दायरे की
तस्वीर नजर आती है
रुपया हो डॉव या निफ्टी
बस दायरे की जंजीर
नजर आती है
और इस रुख में नही हुआ
कुछ फेरबदल
किसी भी खबर पे
नहीं कर पा रहे अमल
यूलिप में दम होगा
और बीमा ज्यादा
तेल के विनिवेश से
सरकार उठायेगी फायदा
ब्याज दर पर मिल
रहे हैं अलग संकेत
कहते हैं एफएम
अगले महीने जायेंगे ऊपर
पर एसबीआई का
कम होगा बेस रेट
लेकिन निफ्टी पे
नहीं होगी कोई विशेष बात
जब तक पूरी तरह से
बरसात नहीं देगा साथ
(शेयर मंथन, 29 जून 2010)

Last Updated ( Tuesday, 29 June 2010 09:33 )
 

कंपनियों की सुर्खियाँ

Custom Search
Copyright © 2010 Share Manthan. All Rights Reserved.
Share Manthan is owned and managed by NaradVani Sanchar Madhyam Pvt. Ltd.

स्पष्टीकरण (disclaimer) देखें। इस वेबसाइट या किसी भी अन्य माध्यम पर शेयर मंथन के किसी भी प्रकाशन या सेवा का उपयोग इस स्पष्टीकरण के अधीन है।