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वापस उछाल भले आये, पर आसार कमजोरी के |
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राजेश अग्रवाल, निदेशक, सीडीइक्विसर्च
बाजार में इस समय कमजोरी के ही आसार लग रहे हैं।
नवंबर की महँगाई दर काफी ऊँची रही है। इसके अलावा अगर खाने-पीने की चीजों की महँगाई दर देखें तो थोक भावों (डब्लूपीआई) पर भी यह 19% है, जो काफी ज्यादा है। अगर खुदरा भावों को देखेंगे तो महँगाई दर और भी ऊँची है। इससे लगता है कि अब रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास ब्याज दर बढ़ाने या सीआरआर में बदलाव करने जैसे कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। साथ ही सरकार भी अपने कुछ प्रोत्साहनों (स्टिमुलस) को वापस ले सकती है। दुनिया में कई देशों ने ऐसा करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, डॉलर अगर वापस चढ़ना शुरू करता है तो काफी बिकवाली आ सकती है। कल अग्रिम कर (एडवांस टैक्स) के आँकड़े मोटे तौर पर काफी अच्छे रहे, फिर भी बाजार टिक नहीं पाया। इससे कमजोरी के ही संकेत मिलते हैं। लेकिन एक बात यह भी है कि जब हर कोई गिरावट की बात सोचने लगे तो बाजार में गिरावट नहीं आती है। इसलिए हो सकता है कि एक वापस उछाल मिल जाये। लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकना मुश्किल होगा। हालाँकि टेलीकॉम क्षेत्र बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, क्योंकि इसमें हद से ज्यादा पिटाई हो चुकी है। (शेयर मंथन, 16 दिसंबर 2009) |
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Last Updated ( Wednesday, 16 December 2009 12:19 )
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