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बाजार में बढ़त की गुंजाइश सीमित |
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राजेश अग्रवाल, निदेशक, सीडीइक्विसर्च
भारतीय शेयर बाजार अभी काफी सीमित दायरे में है, चढ़ने-गिरने वाले शेयरों का अनुपात ज्यादा अच्छा नहीं है और कारोबार की मात्रा भी कम है।
ऐसा लग रहा है कि कारोबारी साल के अंत में बाजार काफी सावधान है। हालाँकि व्यावहारिक रूप में देखें तो बाजार के लिए कारोबारी साल पूरा हो चुका है, क्योंकि आज के सौदे अगले कारोबारी साल में खाते में आयेंगे। कल सरकारी उधारी कम रहने की खबर से बाजार को राहत मिली, लेकिन अब भी ब्याज दरों को लेकर बाजार में चिंता है। महँगाई दर भी बाजार को परेशान कर रही है और साथ में कच्चा तेल अब 80 डॉलर के ऊपर चल रहा है। अभी रुपये में भी तेजी है और रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी इसमें कोई दखल नहीं दे रहा है। दरअसल रुपये में मजबूती नहीं आ रही, बल्कि डॉलर कमजोर हो रहा है, क्योंकि देश में लगातार डॉलर का आना जारी है। तिमाही नतीजे सकारात्मक रहने की उम्मीद जरूर है, लेकिन यह उम्मीद मोटे तौर पर मौजूदा भावों में शामिल है। हो सकता है कि निफ्टी नतीजों के चलते 100-50 अंक चढ़ जाये, लेकिन वैसा होने पर बिकवाली ही करनी चाहिए। बाजार में बढ़त की गुंजाइश सीमित ही है। (शेयर मंथन, 30 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 30 March 2010 10:21 )
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