|
निफ्टी 4700 के नीचे नहीं जायेगा |
|
|
सुदीप बंद्योपाध्याय, एमडी-सीईओ, कॉन्वेक्सिटी सॉल्यूशंस
मेरे विचार से अभी भारतीय बाजार ने अभी अपनी तलहटी (बॉटम) नहीं बनायी है।
छोटी अवधि में बाजार एक सीमित दायरे में चलता रहेगा। निफ्टी इस दौरान 4850 से 5150 के बीच झूलता रह सकता है। अभी वैश्विक बाजारों को स्थिरता पाने में 3-6 महीने लग जायेंगे। हालाँकि अगर वैश्विक बाजारों से अभी और बुरी खबरें आयें, तब भी निफ्टी के 4700 के नीचे फिसलने का अंदेशा नहीं लग रहा है। यूरोजोन के टूटने, विघटित होने का खतरा मुझे नहीं दिख रहा है। इस समय यूरोपीय संघ एक मुश्किल स्थिति से गुजर रहा है, लेकिन यह बना रहेगा और एक मुद्रा के रूप में यूरो भी चलती रहेगी। अगर यूरो का विघटन हो भी जाये, तो इसका भारत पर सीधा भौतिक असर काफी कम होगा। लेकिन निवेशकों पर इसका भावनात्मक असर काफी ज्यादा होगा। जोखिम उठाने की उनकी इच्छा एकदम घट जायेगी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) में भगदड़ मच सकती है। लेकिन यह सब केवल कुछ समय के लिए होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था (जीडीपी) की विकास दर के जो आँकड़े आये हैं, वे काफी संतोषजनक हैं। हमारा अनुमान है कि 2010-11 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर करीब 9% रहेगी। आर्थिक विकास की इस रफ्तार और भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन को देख कर मेरा अनुमान है कि निफ्टी अगले 12 महीनों में 5500 के स्तर तक जा सकता है। यदि विश्व अर्थव्यवस्था का संकट जारी रहा या और बुरी स्थिति बन गयी तो विश्व बाजारों पर निर्भर कई क्षेत्रों को इससे मुश्किल होगी। पर कुल मिला कर भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के रास्ते पर बढ़ती रहेगी। मेरी सलाह होगी कि निवेशक अपना पैसा अगले 3-6 महीनों में धीरे-धीरे लगायें। इन स्तरों पर अपनी पूँजी के 10-20% हिस्से का निवेश किया जा सकता है। कैपिटल गुड्स, ऑटो और बैंक क्षेत्र मुझे ज्यादा बेहतर लग रहे हैं। (शेयर मंथन, 09 जून 2010) |
|
Last Updated ( Wednesday, 09 June 2010 17:23 )
|