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नजर है 4000 पर भी, 7000 पर भी |
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सुशील केडिया, निवेश सलाहकार
इस समय भारतीय शेयर बाजार थोड़ा भारी लग रहा है और किसी भी समय नीचे की ओर पलट सकता है।
ये कह सकते हैं कि हम बिकवाली के लिए बाजार के पलटने का इंतजार कर रहे हैं। जो आक्रामक कारोबारी हैं, वे इन स्तरों पर भी बिकवाली कर सकते हैं। फिलहाल मुझे ऐसा नहीं लगता है कि निफ्टी 5180-5200 के स्तर को पार कर पायेगा। अगर यह स्तर पार हो गया तो इसे हमारी मौजूदा रणनीति में घाटा काटने का स्तर मान लें। हमारा आकलन है कि अभी निफ्टी 5180-5200 को पार किये बिना ही नीचे पलटेगा और करीब 4600 तक गिर सकता है। लेकिन इसके बाद बाजार वापस ऊपर चढ़ेगा और उस तेजी में यह 5400 तक जा सकता है। वहाँ से बाजार में एक और बड़ी गिरावट आयेगी, जो निफ्टी को इस साल मानसून से पहले 4000 तक ले जा सकती है। लेकिन इस बड़ी गिरावट के बाद बाजार में जोरदार तेजी आयेगी और अगले मानसून तक हम निफ्टी को नये शिखर पर 7000 के ऊपर देखेंगे। मेरा यह निष्कर्ष कई तकनीकी विश्लेषणों के आधार पर है। अगर हम सेंसेक्स की प्रति शेयर आय (ईपीएस) के बारे में अलग-अलग ब्रोकिंग फर्मों के अनुमान देख लें तो इसे 2011-12 का औसत अनुमान करीब 1200-1250 रुपये का है। यह आय मार्च 2012 के अंत की होगी, लेकिन बाजार इस अनुमान को करीब 6-8 महीने पहले ही अपने भावों में भुना चुका होगा। जिस तरह दुनिया भर के बड़े निवेशक अब विकसित देशों में बढ़त की गुंजाइश नहीं देख कर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों का रुख कर रहे हैं, उसके आधार पर एफआईआई निवेश में बढ़ोतरी ही होगी, जिससे भारतीय बाजार को उस समय तक 20 का पीई अनुपात मिलना मुश्किल नहीं होगा। इस तरह मौजूदा स्तरों से करीब 40% बढ़त की उम्मीद बनती है और 2011 की दूसरी से चौथी तिमाही के बीच किसी समय तक निफ्टी 7000 पर होना चाहिए। लेकिन एक बड़ी उछाल से पहले बाजार कमजोर हाथों से निकल कर मजबूत हाथों में जायेगा। अभी बाजार हद से ज्यादा खरीदारी की एक स्थिति दिखा रहा है। इसलिए किसी भी बहाने से बाजार में गिरावट आयेगी, जो बाजार को अगली तेजी के लिए नयी ताकत देगी। (शेयर मंथन, 16 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 16 March 2010 10:28 )
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