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और तेजी की गुंजाइश कम, नीचे खरीदारी बेहतर |
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अंबरीश बालिगा, वीपी, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग
भारतीय शेयर बाजार में छोटी अवधि के लिए एक उछाल आ चुकी है, लेकिन यहाँ से और ज्यादा तेजी की गुंजाइश कम ही है।
यह उछाल बिकवाली सौदे कटने से आयी और जितने सौदे कटने थे, वे लगभग कट चुके हैं। डॉलर की कमजोरी के चलते ये बिकवाली सौदे काटे गये हैं। आने वाले दिनों में कई कारणों से बाजार पर दबाव आ सकता है। यूरोप की समस्याएँ अभी बाकी हैं और कुछ समय तक चलती रहेंगी। इनके चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर भले ही असर नहीं हो, लेकिन भारतीय शेयर बाजार से पैसा जरूर निकाला जा सकता है। दुबई में फिर से कर्ज संकट उभरने की खबरें आ रही हैं। यहाँ बजट में सरकारी प्रोत्साहनों को वापस लिये जाने की संभावना है। विकास दर और औद्योगिक उत्पादन के जैसे आँकड़े आये हैं, उनके बाद इन प्रोत्साहनों को बनाये रखने का कोई तर्क नहीं है। प्रोत्साहनों के हटने से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर नहीं होगा, लेकिन यह बात बाजार को नापसंद होगी। अगली मौद्रिक नीति में ब्याज दरें भी बढ़ने की संभावना होगी। लेकिन इन सब बातों से जब बाजार नरम हो तो वह अगली खरीदारी का मौका होगा। निफ्टी को 4650 पर अच्छा सहारा मिलने की उम्मीद रहेगी। अगर 4400 के स्तर दिखें तो वहाँ अपना पूरा निवेश कर लेना बेहतर होगा। (शेयर मंथन, 17 फरवरी 2010) |
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Last Updated ( Wednesday, 17 February 2010 10:11 )
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