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2012 तक निफ्टी 1500 के नीचे Print E-mail

Amit Goelअमित गोयल, निदेशक, पेस फाइनेंशियल सर्विसेज

ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के बारे में हमने अप्रैल-मई 2008 में खतरे की घंटी बजायी थी और लगता है कि फिर से वैसा ही करने का समय आ गया है।

हमारा मानना है कि ब्रिक्स देश और बाकी उभरते बाजार (इमर्जिंग मार्केट्स) काफी बड़े आर्थिक बुलबुले पर बैठे हैं और अगले कुछ वर्षों में इनकी अर्थव्यवस्था एकदम से बैठ जा सकती है। हम विकसित बाजारों को लेकर भी ज्यादा उम्मीदें नहीं लगा रहे। विकसित बाजार और ब्रिक्स देश, दोनों ही नीचे जायेंगे। लेकिन नीचे जाने के दौरान ब्रिक्स देश विकसित देशों से ज्यादा फिसलेंगे।
इस समय लोग कई किस्सों (मिथ) को सच मान बैठे हैं और इनकी वास्तविकता को समझना जरूरी है। कुछ प्रमुख मिथ ये हैं – 1. विश्व अर्थव्यवस्था में वास्तविक सुधार हो रहा है। वास्तव में यह बेहद निचले स्तरों से एक चक्रीय (साइक्लिकल) सुधार है। 2. उभरते देशों की अर्थव्यवस्थाएँ केवल ऊपर जा सकती हैं। 3. केवल विदेशी कर्जों से ही किसी देश की मुद्रा पर संकट आता है। अगले दशक में भरपूर विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले कई देशों की मुद्राएँ अपने अंदरूनी कर्जों के बोझ से संकट में फँस सकती हैं। 4. आउटसोर्सिंग हमेशा जारी रहेगा। लेकिन हमारा मानना है कि अगले 3-4 सालों में विश्व व्यापार 2009 के स्तर से करीब 50% घट जायेगा। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर रोक लगा देंगे, जिससे भारत और फिलीपींस जैसे देशों में काफी बीपीओ बंद हो जायेंगे।
5. सकारात्मक भुगतान संतुलन वाले उभरते देशों की मुद्राएँ सुरक्षित स्वर्ग की तरह हैं। 6. बुनियादी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर खर्च के चलते उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। 7. अब समस्या केवल ग्रीस, दुबई, पुर्तगाल, स्पेन जैसे देशों में ही है और इन्हें किसी तरह निपटा लिया गया तो विश्व अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार में टिकाऊ रूप से सुधार आ जायेगा।
8. उभरते बाजारों में खपत के तौर-तरीके बदल चुके हैं और उनकी खपत में केवल बढ़ोतरी ही हो सकती है। 9. अमेरिकी ट्रेजरी में निवेश अब सबसे कमजोर विकल्प है।
हम विश्व अर्थव्यवस्था में अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं और 2010 इसका शुरुआती साल हो सकता है। इस संकट में ब्रिक्स देशों का तकरीबन सफाया हो सकता है। हमारा अंदाजा है कि 2012 तक निफ्टी 1500 के भी नीचे होगा। शंघाई कंपोजिट करीब 1200 पर और ब्राजील का बोवेस्पा करीब 15000 पर आ जायेगा। विकसित देश 2010 के ऊपरी स्तरों से अपनी बाजार पूँजी का करीब 50-60% गँवा देंगे। (शेयर मंथन, 29 मार्च 2010)

Last Updated ( Thursday, 01 April 2010 10:16 )
 

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