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सरकारी घाटे में कमी उत्साहजनक |
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जगन्नादम तुनुगुंटला, रिसर्च प्रमुख, एसएमसी ग्लोबल : सरकार ने अगले 2-3 सालों में सरकारी खजाने का घाटा (Fiscal Deficit) घटा कर 3% के पास ले जाने की बात कही है, जो एफआरबीएम लक्ष्य है।
यह बात काफी उत्साहजनक है। शेयर बाजार और खास कर विदेशी निवेशकों को यह बात पसंद आयेगी। पिछले साल जब सरकारी घाटे का लक्ष्य 5.5% रखा गया था, तो उस समय यह थोड़ा अतार्किक लगा था। लेकिन 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में काफी अच्छी रकम मिल जाने के चलते सरकारी घाटा उस लक्ष्य से भी कम केवल 5.1% रहा है। वैसे तो संपत्ति बेच कर घाटा कम करना कोई आदर्श स्थिति नहीं है, लेकिन फिर भी इससे यह पता चलता है कि वित्त मंत्री सरकारी घाटा कम करने को लेकर कितने गंभीर हैं। इस कारोबारी साल में लक्ष्य के मुताबिक विनिवेश (Disinvestment) नहीं हो पाया। इसके बावजूद अगले साल के लिए 40,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इससे लगता है कि विनिवेश की गाड़ी चलती रहेगी और खास तौर से सरकारी आईपीओ-एफपीओ के मोर्चे पर यह बात उत्साहजनक है। जहाँ तक कंपनियों पर करों के बोझ की बात है, उन्हें कोई खास फायदा-नुकसान नहीं है। दरअसल इन बजट प्रस्तावों से सरकार को मिलने वाले प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) में 11,500 करोड़ रुपये की कमी होगी, जबकि अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) में 11,200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को जरूर आय कर में कुछ राहत मिली है। वरिष्ठ नागरिकों को भी राहत दी गयी है। इससे लोगों के हाथ में थोड़ा और पैसा बचेगा, जिससे महँगाई की मार कुछ हल्की होगी। इस देश में करीब 3 करोड़ करदाता हैं, जो कुल आबादी का लगभग 3% है। ऐसा लगता है कि वित्त मंत्री ने इस बार के बजट में करदाताओं के बदले बाकी 97% लोगों पर ध्यान दिया है। कृषि पर इस बजट में खास जोर दिया गया है। उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में बढ़ोतरी नहीं करना एक साहसिक कदम है। इससे साफ दिखता है कि वित्त मंत्री विकास दर की रफ्तार में कोई कमी नहीं चाहते हैं। (Jagannadham Thunuguntla, Head of Research, SMC Global Securities) (शेयर मंथन, 28 फरवरी 2011) |
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Last Updated ( Monday, 28 February 2011 16:36 )
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