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बाजार में गिरावट का खतरा ज्यादा |
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जगन्नादम तुनुगुंतला, इक्विटी प्रमुख, एसएमसी कैपिटल
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए मुझे भारतीय बाजारों में गिरावट बढ़ने की आशंका नजर आ रही है।
पिछले 8-9 महीनों से बाजार बड़ी गिरावट को किसी न किसी तरह टालने में कामयाब रहा है। आज बाजार नकारात्मक रुझान के साथ सपाट रहने की उम्मीद है। अगर यूरोप का संकट बढ़ता है तो बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है। मुझे लगता है कि यूरोपीय देश समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं, बल्कि उसे किसी तरह से टाल रहे हैं। मसलन जर्मनी और फ्रांस जैसे बड़े देश अपना वित्तीय घाटा बढ़ाकर ग्रीस और पुर्तगाल जैसे देशों की मदद कर रहे हैं। अगर यही हालात रहे तो एक मुद्रा के तौर पर यूरो का वजूद भी खत्म हो सकता है। साथ ही अगले 8 से 9 महीने में अमेरिका और ब्रिटेन की रेटिंग घटने का भी खतरा मंडरा रहा है। चीन से निवेशकों को बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन वहाँ संपत्ति (प्रॉपर्टी) क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ रही है। साथ ही महँगाई भी बढ़ रही है। ऐसे में चीन का शेयर बाजार मंदी के दौर में चले जाने की आशंका दिख रही है। भारत के टेलीकॉम क्षेत्र पर टीआरएआई की सिफारिशों का काफी बड़ा असर होगा। इस क्षेत्र में पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धा है। विकसित देशों में आम तौर पर 4-5 ऑपरेटर होते हैं, लेकिन हमारे देश में 14-15 ऑपरेटर हो चुके हैं। आगे चलकर इन कंपनियों में खरीद-बिक्री के कई सौदे हो सकते हैं। मुझे लगता है कि इस मारामारी में भारती को छोड़कर अन्य सभी कंपनियों की मुश्किल बढ़ेगी। (शेयर मंथन, 12 मई 2010) |
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Last Updated ( Wednesday, 12 May 2010 10:07 )
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