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ऊपरी स्तरों पर बिकवाली ही बेहतर : विनोद शर्मा (V.K. Sharma) |
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अभी यह बाजार ऐसा है जिसमें लोगों के पास काफी नकदी है, लेकिन भरोसा कम है।
दरअसल विश्व के सामने जो समस्याएँ हैं, वे इतनी आसानी सुलझने वाली नहीं हैं। जब इनका इलाज होगा तो काफी दर्द भी होगा। हमारी अर्थव्यवस्था चाहे जितनी भी मजबूत हो, लेकिन यह दुनिया से जुड़ी है। ग्रीस की समस्या पर यूरोप जो कुछ करना चाहता है, उसका अभी कोई नतीजा नहीं निकलना है। दरअसल ग्रीस से ज्यादा बड़ी समस्या तो इटली की है, जो बाद में उभरेगी। यूरोप में लोग अभी गोंद चिपका कर जो कुछ कर रहे हैं, वह गोंद एक महीने बाद उखड़ता नजर आयेगा। कुल मिला कर अभी वहाँ स्थिति ज्यादा साफ नहीं है। ऐसे माहौल में अगर निफ्टी 200 अंक भी बढ़े, तो वहाँ अपने शेयर बेचने चाहिए। जब बाजार वापस नीचे आये तो फिर खरीद लें। अभी आम निवेशक को अपने पोर्टफोलिओ के 20-30% हिस्से में इस तरह ऊपर-नीचे खरीदने-बेचने के सौदे करते रहने चाहिए। यह बाजार भाग कर कहीं नहीं जाने वाला। बेशक लंबी अवधि के लिहाज से बाजार में उम्मीदें ही ज्यादा हैं। लेकिन अगर हम मध्यम अवधि के लिहाज से देखें तो किसी बड़ी उछाल की उम्मीद कम है, और बड़ी गिरावट की संभावना उसकी तुलना में काफी ज्यादा है। इसलिए जब भी 5400 के आसपास दिखे तो अपने निवेश की स्थिति हल्की कर लें। आम निवेशकों के लिए यह अपने घोड़े बदलने का भी अच्छा मौका है। कमजोर शेयरों से निकल कर ऐसे शेयरों में जायें, जहाँ भरोसा ज्यादा है। अगर दो साल के नजरिये से निवेश करना हो तो मेरी सलाह रहेगी कि बैंकिंग शेयरों को चुनें। अगले 3-4 महीनों में जब भी कमजोरी आये तो बैंक शेयरों को खरीदें। भाग कर एकदम से नहीं खरीदना है, जब भाव नीचे जाये तो टुकड़ों में खरीदें। इस तरह अगले 6 महीने तक इन्हें निचले भावों पर खरीदते रहें और फिर 2 साल तक रखें। विनोद शर्मा, प्रमुख (प्राइवेट ब्रोकिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट), एचडीएफसी सिक्योरिटीज (V.K. Sharma, Head, Private Broking & Wealth Management, HDFC Securities) (शेयर मंथन, 02 नवंबर 2011) |
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Last Updated ( Wednesday, 02 November 2011 11:50 )
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