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गिरावट पर खरीदारी के लिए नकदी रखें हाथ में |
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नीरज दीवान, निदेशक, क्वांटम सिक्योरिटीज
भारतीय शेयर बाजार अभी कुछ जमने (कंसोलिडेशन) की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें एक चाल (मोमेंटम) बन रही है।
इसलिए बाजार में मजबूती रह सकती है। अभी बजट-पूर्व तेजी बन रही है। फिलहाल एक चिंता बैंकों को लेकर ही है। अगर रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति कुछ कस दी तो बैंकों के शेयरों में उसकी प्रतिक्रिया दिखेगी। बाजार में उस समय कुछ नरमी आ सकती है। लेकिन मुझे लगता है कि उस नरमी का इस्तेमाल खरीदारी के मौके की तरह करना चाहिए। इस समय बाजार में सस्ते (वैल्यू) शेयर खोजना मुश्किल हो गया है, इसलिए गिरावट आने पर खरीदारी की रणनीति रखें। टेलीकॉम शेयर सस्ते हैं, लेकिन उनमें मजबूती आने में 1 साल का समय लग जायेगा। अगर 1 साल से ज्यादा का निवेश करना है तो यह क्षेत्र ठीक है। कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर के कुछ शेयरों के मूल्यांकन भी अभी ठीक हैं। तेल-गैस क्षेत्र के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने वाली कंपनियों, जैसे पाइपलाइन और रिग बनाने वाली चुनिंदा कंपनियाँ अच्छी लग रही हैं। अभी पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहिए। जहाँ मुनाफा मिल रहा हो और मूल्यांकन महँगा हो गया हो, उन शेयरों को बेच कर सस्ते अच्छे शेयरों को खरीदें। हाथ में 15-20% नकदी रखना बेहतर होगा, जिससे गिरावट का फायदा लिया जा सके। निफ्टी का 4700 से नीचे जाना मुश्किल लगता है, लेकिन यहाँ से 10% नीचे 4700 तक तो जा ही सकता है। (शेयर मंथन, 19 जनवरी 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 19 January 2010 10:20 )
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