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उन्माद दिखने लगा है बाजार में |
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कवि कुमार, सीईओ, मल्टीपल-एक्स कैपिटलभारतीय बाजार यहाँ मजबूत लग रहा है, क्योंकि बाजार थोड़ा नीचे जाते ही खरीदने वाले आ जाते हैं।
रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने से चिंता तो है, लेकिन अर्थतंत्र में नकदी की कमी नहीं है। ऑटो कंपनियों के बिक्री आँकड़े अच्छे आ रहे हैं। नकदी आधारित तेजी के बाजार में इस समय तर्क नहीं काम कर रहे हैं और एक तरह का उन्माद (Euphoria) दिखने लगा है। इसे एक उदाहरण के तौर पर समझा जा सकता है। एचडीएफसी (HDFC) के शेयर में 70% तक डिलीवरी हो रही है। मतलब कोई तो है जो खरीद रहा है। मैं अपने 20 साल के अनुभव से कह रहा हूँ कि बाजार का शिखर जापानी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के बाजार में आने पर बनता है। 1994 में भी ऐसा हुआ और 2008 की मंदी में भी जापानी निवेशक आये। फिलहाल भारतीय बाजार में अमेरिकी विदेशी निवेशक सक्रिय हैं, जापानी एफआईआई तो बाजार में अभी आये ही नहीं हैं। ऐसे में निफ्टी 6800 क्या 7800 तक भी जा सकता है। (शेयर मंथन, 04 नवंबर 2010) |
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Last Updated ( Thursday, 04 November 2010 10:03 )
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