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तकनीकी तौर पर सुधार की गुंजाइश |
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नितेश चांद, तकनीकी विश्लेषक, साइक्स एंड रे इक्विटीजइस समय भारतीय शेयर बाजारों में तकनीकी तौर पर सुधार (करेक्शन) की गुंजाइश दिख रही है।
बाजारों के सूचकांक इस समय अधिक खरीदारी के क्षेत्र (ओवरबॉट जोन) में चले गये हैं। यदि निफ्टी में दिन भर मोटे तौर पर 3250 के स्तर के ऊपर कारोबार हो और आखिर में यह इस स्तर के ऊपर बंद होने में कामयाब रहे, तो इससे संकेत मिलेगा कि हमारे शेयर बाजारों में आगे सकारात्मक रुख रहने की उम्मीद है। यदि निफ्टी इस स्तर को बरकरार नहीं रख पाता और इसके नीचे चला जाता है, तो उस हालात में भारतीय शेयर बाजारों में कमजोरी आ सकती है। आगामी लोकसभा चुनावों तक निफ्टी के लिए ऊपर का दायरा 3350 तक का है, जबकि नीचे की ओर यह 2700 तक जा सकता है। जहाँ तक हमारे बाजारों में बिना किसी खास कारण के पिछले कुछ हफ्तों में आयी मजबूती का सवाल है, ऐसा जरूरी नहीं है कि बाजारों की हर चाल के पीछे हमें बुनियादी बदलाव दिखें। यदि हम साल 2008 से शेयर बाजारों में आरंभ गिरावट की बात करें, तो उस गिरावट की शुरुआत के पीछे कोई खास बुनियादी कमजोरी नहीं थी। जब कोई शेयर आकर्षक कीमत पर उपलब्ध होता है, तो उसमें खरीदारी शुरू हो जाती है। दूसरी ओर कमजोरी को भी इसी तरीके से देखा जा सकता है। |