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अभी नये निवेश का समय नहीं: अरविंद पृथी (Arvind Pruthi) |
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भारतीय बाजार अभी काफी दबाव में है, खास कर अमेरिका और यूरोप में सुस्ती की आशंका से भारतीय बाजार दबाव बढ़ा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के निवेश में भी कमी आयी है। वे इन दिनों अपना जोखिम कम करने के लिए हेजिंग की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वे नकद में थोड़ी खरीदारी कर भी रहे हैं तो वायदा कारोबार में बिकवाली कर रहे हैं। घरेलू मोर्चे पर भी बाजार में कई चुनौतियाँ हैं। मसलन महँगाई बढ़ने का खतरा अभी बरकरार है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में आगे चल कर 0.5% तक की और बढ़ोतरी कर सकता है। अगली तिमाही में भारतीय कंपनियों के नतीजों पर महँगाई और ब्याज दरों का असर ज्यादा दिखेगा। भारतीय बाजार पर चौतरफा दबाव के चलते मुझे निफ्टी के 5250 तक फिसलने की आशंका लग रही है। मौजूदा हालात में भारतीय बाजार में अभी नये निवेश का समय नहीं है। इस समय कोई ऐसा क्षेत्र नहीं दिख रहा है जहाँ अच्छे मुनाफे की गुंजाइश हो। इस बाजार में पैसे बनाना बेहद मुश्किल लग रहा है। खुदरा निवेशकों की बाजार में दिलचस्पी कम हो गयी है। वहीं नया निवेश कम आने से घरेलू म्यूचुअल फंड भी ठंडे पड़े हैं। हालाँकि मुझे लगता है कि छोटी अवधि में बाजार में दबाव जरूर है, लेकिन लंबे समय के नजरिये से भारत की विकास दर (GDP) अच्छी रहेगी और बाजार में भी तेजी का दौर लौटेगा। अरविंद पृथी, वीपी, आईएफसीआई फाइनेंशियल सर्विसेज (Arvind Pruthi, VP, IFCI Financial Services) (शेयर मंथन, 04 अगस्त 2011) |
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Last Updated ( Thursday, 04 August 2011 08:56 )
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