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बाजार की तलहटी यहाँ नहीं बनेगी : अरुण केजरीवाल (Arun Kejriwal) |
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अभी कुछ लोग तेजी आने की बात करने लगे हैं, लेकिन मुझे अभी कम-से-कम अगले 2 महीनों के लिए तो बाजार कमजोर ही लग रहा है।
इसमें बाजार कितना गिरेगा, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। बाजार में हर नयी तलहटी के साथ लोगों का भरोसा ज्यादा टूटेगा। बाजार किसी झरने की तरह फिसल रहा है और लगातार नयी तलहटियाँ बन रही हैं। दिसंबर तिमाही में कंपनियों के नतीजे कमजोर रहेंगे, जिसके बाद कंपनियों की आय और सेंसेक्स ईपीएस के अनुमानों में कटौती होगी। मेरी नजर इस बात पर होगी कि महँगाई दर वास्तव में घटनी शुरू हो जाये और ब्याज दरों में नरमी आने लगे। साथ ही यह देखना होगा कि बजट के बाद चीजें ठीक होती लगती हैं या नहीं। अभी लोग सोच रहे हैं कि निफ्टी 4700-4600 के बीच तलहटी बना रहा है। निफ्टी 4-5 बार इन्हीं स्तरों से वापस पलट चुका है, लिहाजा लोग फिर यहीं से इसके पलटने की बात कर रहे हैं। लोग सोच रहे हैं कि यहाँ खरीद कर 200-300 अंक ऊपर बेचा जा सकता है। लेकिन मेरा तजुर्बा है कि जब आम लोग किसी कारोबारी दायरे को पकड़ कर बैठते हैं तो वहाँ उन्हें अपनी जेब से पैसे देने पड़ जाते हैं। अभी बाजार में तेजी का कोई कारण नहीं दिख रहा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था ठीक नहीं चल रही है। अपने यहाँ कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहा है। अभी संकेत आ रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के चुनाव बजट के पहले करा लिये जायेंगे। आम तौर पर लोग अच्छा बजट ला कर चुनाव में उसका फायदा लेने की कोशिश करते हैं। इसके बदले ये बजट से पहले चुनाव कराना चाहते हैं। इसी बात से समझ लेना चाहिए कि तस्वीर कैसी है। मतलब साफ है कि बजट में किसी बात की उम्मीद न करो। क्या यह बाजार के लिए सकारात्मक होगा? यह सब देख कर मुझे लगता है कि बाजार को जमने और तलहटी बनाने में अभी समय लगेगा। यह भी याद रखें कि जब भी मंदी के दौर में बाजार अचानक बढ़ता है तो उसके बाद वह उसका दोगुना घट भी जाता है। अरुण केजरीवाल, निदेशक, क्रिस (Arun Kejriwal, Director, KRIS) (शेयर मंथन, 16 दिसंबर 2011) |
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Last Updated ( Friday, 16 December 2011 11:25 )
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