|
भारतीय बाजारों में और बढ़ेगा विदेशी निवेश |
|
|
डी डी शर्मा, सीनियर वीपी (रिसर्च), आनंद राठी सिक्योरिटीज
लंबे समय के लिए भारतीय बाजार काफी मजबूत लग रहे हैं और मुझे लगता है कि आने वाले कुछ सालों में बाजार नयी ऊँचाई छू सकते हैं।
मेरे हिसाब से भारत में विकास की अपार संभावनाएँ हैं और विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार में पैसा लगाने के इच्छुक हैं। इसी साल एफआईआई भारत में करीब 18 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। उभरते देशों (इमर्जिंग मार्केट्स) में अगले कुछ सालों में 8-9% विकास दर रह सकती है। वहीं विकसित देशों की विकास दर 1-2% रहने की उम्मीद है। ऐसे में भारत और दूसरे उभरते देशों में निवेश पर मुनाफे की गुंजाइश ज़्यादा है। दुनिया भर के बाजारों में उभरते देशों की पूंजी की हिस्सेदारी 30% है। उभरते देशों में अकेले भारत की हिस्सेदारी 30% है। लेकिन विदेशी निवेशक अपनी कुल रकम का केवल 10% ही उभरते बाजारों में लगा रहे हैं। मुझे लगता है कि अगले 2-3 सालों में विदेशी निवेशकों का उभरते बाजारों में निवेश उनके कुल निवेश का कम-से-कम 30% हो जायेगा। इसमें से ज्यादातर पैसा भारत में आयेगा। अगर लंबे समय के बारे में सोचें तो मुझे भारतीय बाजार में कोई जोखिम नहीं नजर आ रहा। बाजार के गिरने-चढ़ने की चिंता एक-दिनी कारोबार (Intraday Trading) करने वालों को होती है। मुझे लंबे समय के नजरिये से सभी क्षेत्र ठीक लग रहे हैं। किसी कमजोर क्षेत्र के बारे में मेरे लिए कहना मुश्किल है। (शेयर मंथन, 28 सितंबर 2010) |
|
Last Updated ( Tuesday, 28 September 2010 09:41 )
|