|
एफआईआई और विश्व बाजारों पर टिकी है दिशा |
|
|
अशोक अग्रवाल, प्रमुख, एस्कॉर्ट्स सिक्योरिटीज
इस समय विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार बड़ी बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार दबाव में है।
सोमवार को उनकी 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली थी। उसके जवाब में घरेलू संस्थाएँ (डीआईआई) खरीदारी कर रही हैं, लेकिन फिर भी बाजार गिर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अभी कुछ और तीखी गिरावट के अंदेशे हैं। यहाँ रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नयी कर्ज नीति में सीआरआर में बढ़ोतरी तो हर कोई पक्की ही मान रहा है, ब्याज दरों के बढ़ने को लेकर भी आशंकाएँ हैं। अच्छी बात यही रही है कि तिमाही नतीजे अच्छे रहे हैं। दूसरे, मूल्यांकन अब सस्ते तो नहीं, लेकिन कुछ उचित स्तर पर हैं। अगर 2010-11 की अनुमानित आय पर देखें तो बाजार करीब 15-16 के पीई अनुपात पर है। बाजार में फिर से नकदी (लिक्विडिटी) बढ़नी शुरू होती है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर है कि अमेरिका में नीतियाँ कितनी कसी जाती हैं। भारतीय बाजार में अभी काफी असमंजस है और तेजी-मंदी दोनों की संभावनाएँ दिखती हैं। इस समय अपने पोर्टफोलिओ में बदलाव लाने चाहिए। अच्छा प्रदर्शन कर रहे शेयरों को पोर्टफोलिओ में बनाये रखें और कमजोर शेयरों को निकाल दें। हाथ में करीब 25-50% तक नकदी रखें। अगर एफआईआई बिकवाली जारी रही और अगले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की हालत नहीं सँभली तो यहाँ गहरी गिरावट आ सकती है। तब निफ्टी 4700, 4500 या 4300 - किस स्तर पर जाकर रुकेगा यह कहना मुश्किल है। उन निचले स्तरों पर खरीदारी के लिए हाथ में नकदी रखनी चाहिए। लेकिन अगर बाजार एकदम से सकारात्मक हो जाये तो 5150 और 5250 के ऊपर जाने पर फिर से खरीदारी की जा सकती है। (शेयर मंथन, 27 जनवरी 2010) |
|
Last Updated ( Wednesday, 27 January 2010 10:02 )
|