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अगली तेजी से पहले एक तकनीकी गिरावट जरूरी |
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अनीता गांधी, संस्थागत बिक्री प्रमुख, अरिहंत कैपिटल
भारतीय शेयर बाजार की अंदरुनी धारा तो अभी अच्छी है, लेकिन बाजार में तकनीकी रूप से एक हल्की गिरावट की संभावना दिख रही है।
निफ्टी में जिस तरह से 4674 के बाद से लगातार मजबूती रही है, उसके हिसाब से अगली तेजी से पहले बाजार में एक तकनीकी गिरावट जरूरी लगती है, भले ही वह छोटी गिरावट हो। या फिर बाजार इन स्तरों पर जमने (कंसोलिडेशन) की कोशिश करेगा। फिलहाल छोटी अवधि के लिए निफ्टी को 5315 पर बाधा मिलेगी। लेकिन नीचे की ओर 5000-5050 पर निफ्टी को एक मजबूत आधार मिल रहा है। मुझे नहीं लगता कि गिरावट आने पर बाजार इससे ज्यादा फिसलेगा। जनवरी में निफ्टी के 5300 तक चढ़ने के बाद जो गिरावट आयी थी, वह अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के चलते विश्व बाजारों में आयी कमजोरी का नतीजा थी। लेकिन इस समय विश्व बाजारों की स्थिति भी ठीक है। मगर हमें रुपये की चाल पर नजर रखनी होगी। रुपये की मजबूती के चलते निर्यात पर निर्भर क्षेत्रों, जैसे आईटी, कपड़ा (टेक्सटाइल) और दवा (फार्मा) पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं कच्चे तेल के भाव 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने की संभावना दिख रही है। ऐसा होने पर तेल-गैस उत्पादन करने वाली (अपस्ट्रीम) कंपनियों, जैसे ओएनजीसी और रिलायंस वगैरह को फायदा हो सकता है। अभी बाजार में इसी तरह क्षेत्रवार अलग-अलग चाल दिखती रहेगी। पूरे बाजार में एक साथ तेजी की गुंजाइश कम रहेगी। (शेयर मंथन, 01 अप्रैल 2010) |
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Last Updated ( Thursday, 01 April 2010 10:45 )
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