देवेन चोकसी, एमडी, केआर चोकसी सिक्योरिटीज
इन्फोसिस के नतीजे अच्छे रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी प्रबंधन ने 2010-11 में आमदनी 16-18% बढ़ने का अनुमान सामने रखा है।
हमारा सोचना था कि शायद प्रबंधन करीब 15% की बढ़त का अनुमान रखेगा। कंपनी के इस अनुमान को देख कर ऐसा लगता है कि शायद वास्तविक बढ़त 20% के आसपास हो सकती है। हम अगर डॉलर का भाव 44 रुपये रख कर चलें तो कंपनी ने जो अनुमान दिये हैं, उनके आधार पर अगले कारोबारी साल में 122-124 रुपये की प्रति शेयर आय (ईपीएस) की उम्मीद की जा सकती है। इस हिसाब से अभी इन्फोसिस का शेयर भाव 1 साल आगे की अनुमानित आय के करीब 21 गुना अनुपात पर चल रहा है। हमने देखा है कि जब भी इन्फोसिस का पीई अनुपात 20 के करीब आता है तो इसमें खरीदारी उभर जाती है। इसका मतलब यह है कि इन्फोसिस में मौजूदा स्तरों से गिरावट की संभावना सीमित ही रहेगी। इस कारोबारी साल के अंत तक इन्फोसिस के लिए हमारा लक्ष्य भाव 3000 रुपये का है। यह लक्ष्य मौजूदा अनुमानों के आधार पर है और अगर आगे चल कर अनुमान बढ़ाये जाते हैं तो इस लक्ष्य में भी बढ़ोतरी हो सकती है। मोटे तौर पर यह शेयर इस कारोबारी साल में 2500 रुपये से 3000 रुपये के दायरे में रह सकता है। अगर छोटी अवधि की यानी अगले 2 महीनों की बात करें तो यह नीचे 2575 रुपये और ऊपर 2750-2800 रुपये तक के दायरे में घूम सकता है। इन्फोसिस के इस नतीजे में मुझे सकारात्मक बात यह लगी है कि लागत बढ़ने के सारे दबावों के बावजूद कंपनी ने अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को 1% बढ़ाया है। एबिटा और शुद्ध लाभ, दोनों स्तरों पर यह दिखा है कि कंपनी ने बढ़ी लागत की भरपाई ज्यादा मात्रा में कामकाज से की है। साथ ही, बीती तिमाही में डॉलर का औसत भाव 45.93 रुपये रहने के बावजूद इसका ज्यादा दबाव कंपनी के नतीजों पर नहीं आया, जिससे साफ है कि इसने काफी अच्छी तरह हेजिंग रणनीति अपनायी। इन नतीजों में कोई बड़ी नकारात्मक बात तो नहीं दिखी, लेकिन अगर लागत बढ़ने का दबाव जारी रहा तो मार्जिन पर असर पड़ सकता है। हालाँकि अब तक कंपनी ने इस पहलू को काफी अच्छी तरह सँभाला है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया अगर तेजी से मजबूत होने लगा तो कंपनी को दिक्कत होगी। पर मुझे ऐसा होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये को एक हद से ज्यादा ऊपर नहीं जाने देंगे। (शेयर मंथन, 13 अप्रैल 2010) |