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निफ्टी (Nifty) 5640 के ऊपर जाने की उम्मीद कम |
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संजीव अग्रवाल, निदेशक, डायनामिक्स रिसर्चमुझे नहीं लगता कि बाजार की मौजूदा तेजी बहुत ज्यादा खिंचेगी और मेरे विचार से अब भी भारतीय बाजार में कमजोरी आने की ही संभावना ज्यादा है।
बाजार इस समय तेजी के अंतिम चरण का विस्तार देख रहा है। मुझे लगता है कि बाजार में जनवरी 2008 की स्थिति फिर से बन रही है। निफ्टी (Nifty) एक बार फिर से 23-24 के पीई (PE) अनुपात पर है। मुझे लग रहा है कि एक बार फिर जनवरी 2008 की कहानी दोहरायी जा सकती है, मतलब बड़ी गिरावट आ सकती है। ऐसे में मेरी सलाह रहेगी कि कमजोरी का संकेत मिलते ही बिकवाली करनी चाहिए। मुझे लगता है कि 5590 से थोड़ी-थोड़ी बिकवाली शुरू कर देनी चाहिए और 5640 पर बिकवाली बढ़ा देनी चाहिए। मुझे लगता है कि निफ्टी (Nifty) के 5350 के नीचे फिसलने पर बड़ी गिरावट आ सकती है। वैसी हालत में अगले कुछ महीनों में 4,000 का स्तर दिख सकता है। मुझे लगता है कि बाजार की मौजूदा तेजी का बुनियादी आधार नहीं है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता। वे बड़ी तेजी से अपनी चाल बदल लेते हैं। इस साल मई में भी एफआईआई ने ऐसा ही किया था। मुझे रियल्टी क्षेत्र सबसे ज्यादा कमजोर लग रहा है। वहीं मँझोले (Midcap) बैकों में अभी तेजी की गुंजाइश कुछ बाकी है। (शेयर मंथन, 07 सितंबर 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 07 September 2010 10:17 )
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