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फॉर्मा
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डॉक्टर रेड्डीज लैबोरेटरीज को एक उद्यमी वैज्ञानिक डॉक्टर अंजी रेड्डी ने वर्ष 1984 में स्थापित किया था।
डॉक्टर रेड्डी ने 40 हजार डॉलर नकद और 1.20 लाख डॉलर बैंक से कर्ज लेकर कंपनी की शुरुआत की थी और आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी दवा कंपनी है। इसके अलावा यह एशिया-प्रशांत (जापान से बाहर) से न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली फार्मा कंपनी है। वर्तमान में कंपनी एपीआई, तैयार दवाओं और बायोलॉजिक्स का निर्माण करती है और सौ से अधिक देशों को इसका निर्यात करती है। मौजूदा समय में कंपनी की बागडोर अंजी रेड्डी के हाथ में है और वह कंपनी के चेयरमैन हैं। हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज का राजस्व कारोबारी साल 2008-09 में 3,584.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ इस दौरान बढ़कर 560.89 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इससे पिछले साल में कंपनी ने 475.2 करोड़ रुपये मुनाफा कमाया था। अधिग्रहित कंपनी बीटाफार्म की अमूर्त आस्तियों को बट्टे खाते में डालने से चौथी तिमाही में कंपनी को 978 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी ने रूसी और सीआईएस बाजार में अपनी पैठ जमा ली है। इन बाजारों से 2008-09 में कंपनी की 15 करोड़ डॉलर की बिक्री हुई। 1992 में रूसी बाजार में उतरने के बाद डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज वहाँ की अग्रणी कंपनी बन गयी है। रीस्ट्रक्चरिंग योजना के तहत डॉ रेड्डीज ने अपनी एटलांटा (अमेरिका) में स्थित संशोधन इकाई को बंद करने का फैसला किया है। 1 जुलाई 2009 से कंपनी का कुल दवा संशोधन सब्सिडियरी ऑरिजीन के तहत आ जायेगा। कारोबारी साल 2008-09 में डॉ रेड्डीज ने दवा संशोधन पर अपने राजस्व का 6 फीसदी खर्च किया था। |
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Last Updated ( Thursday, 11 June 2009 13:40 )
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