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एफएमसीजी
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हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड को पहले हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड के नाम से जाना जाता था।
सन् 1888 की गर्मियों में कोलकाता हार्बर के निकट दर्शकों ने सनलाइट सोप बार्स का विज्ञापन देखा। यह एफएमसीजी उत्पादों की मार्केटिंग के युग की शुरुआत थी। इसके बाद 1895 में लाइफबॉय, पियर्स, लक्स व विम जैसे अन्य प्रसिद्घ ब्रांड पेश किये। देश में साल 1918 में वनस्पति लांच किया गया और 1937 में प्रसिद्ध ब्रांड डालडा को पेश किया गया। वास्तव में वर्ष 1931 में यूनिलीवर ने अपनी पहली भारतीय सब्सिडियरी हिंदुस्तान वनस्पति मैन्यूफैक्चरिंग के नाम से स्थापित की। जिसके बाद 1933 में लीवर ब्रदर्स इंडिया लिमिटेड और साल 1935 में यूनाइटेड ट्रेडर्स लिमिटेड की स्थापना की गयी। इन तीनों कंपनियों का नवंबर 1956 में विलय कर हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड का रूप दिया गया। हिंदुस्तान लीवर ने अपनी इक्विटी के 10% शेयर घरेलू निवेशकों को जारी किये। मौजूदा समय में कंपनी में यूनिलीवर की हिस्सेदारी 51.55% है। जबकि शेष इक्विटी लगभग 3.80 लाख आम निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के पास है। वर्ष 1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद कंपनी ने अपने उत्पादों का भारी विस्तार किया। आज हिंदुस्तान यूनिलीवर के एफएमसीजी उत्पाद लगभग हर घर में इस्तेमाल किये जाते हैं। कंपनी के ब्रांडों में लक्स, लिरिल, रेक्सोना, सर्फ एक्सेल, रिन, फेयर एंड लवली, पांड्स, सनसिल्क, क्लिनिक, पेप्सोडेंट, क्लोज अप जैसे कई ब्रांड शामिल हैं। कारोबारी साल 2008-09 में कंपनी का शुद्ध लाभ 2,504 करोड़ रुपये रहा, जबकि इस दौरान कंपनी की कुल आमदनी 21,059 करोड़ रुपये रही। |
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Last Updated ( Thursday, 11 June 2009 15:13 )
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