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शेयर बाजार
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राजीव रंजन झा
सेंसेक्स-निफ्टी अपने 14 महीनों के ऊँचे स्तर पर हैं और इसके साथ ही बाजार का मिजाज एकदम से बदला-बदला दिख रहा है।
हाल में मैंने बार-बार जिक्र किया है कि निफ्टी 4000-4100 से लेकर 4700 के दायरे में अटका है और इसके 4700 से ऊपर जाने पर बाजार एक नयी उछाल भर सकता है। यह मोटे तौर पर एक तकनीकी उम्मीद है। लेकिन क्या बुनियादी रूप से बाजार में यहाँ से किसी बड़ी उछाल की उम्मीद रखना ठीक है? वह भी ऐसी हालत में, जब सेंसेक्स-निफ्टी मार्च से अब तक मोटे तौर पर दोगुने हो चुके हैं? क्या 16,000 के ठीक नीचे खड़े सेंसेक्स के लिए अगले 6 महीने में नये शिखर बनाना संभव है? पहली बात, सेंसेक्स की प्रति शेयर आय (ईपीएस) के अनुमानों को विश्लेषक फिर से बढ़ाने लगे हैं। चंद महीनों पहले तक इन्हें घटाने का सिलसिला चल रहा था। लोग सेंसेक्स की ईपीएस घट कर वापस 750-800 रुपये हो जाने की बातें कर रहे थे। मगर अब विश्लेषक सेंसेक्स ईपीएस को 2009-10 में 1000-1100 रुपये और अगले कारोबारी साल 2010-11 में 1200-1300 तक देखने लगे हैं। इस बार तिमाही नतीजों ने बाजार को काफी सकारात्मक ढंग से चौंकाया है। अगर अगली तिमाही भी अच्छी निकली, तो बाजार का उत्साह काफी बढ़ जायेगा। विश्व बाजार की चिंताओं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, घरेलू निवेशकों की निराशा और खुद घरेलू अर्थव्यवस्था के धीमे पड़ने के चलते सेंसेक्स के लिए भविष्य के अनुमानित पीई अनुपात भी कम रखे जाने लगे थे। अब बदली स्थितियों में लोग ज्यादा पीई अनुपात रख कर सेंसेक्स-निफ्टी के लक्ष्य तय करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होंगे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी लगातार जारी है। अगर विश्व बाजारों में फिर से कोई उथल-पुथल न मचे, तो यह खरीदारी जारी रह सकती है। अब से 6 महीने बाद बाजार 2010-11 के अनुमानित आँकड़ों के हिसाब से सेंसेक्स के लक्ष्य तय करना शुरू कर देगा। इसलिए अगर 2010-11 में 1250 रुपये की ईपीएस का अनुमान लेकर भी चलें, तो 15 के पीई अनुपात पर 18,750 का, 17 के पीई अनुपात पर 21,250 यानी पिछले शिखर के आसपास का, और 20 के पीई अनुपात पर 25,000 का लक्ष्य बनता है। माना कि ये बेहद आशावादी लक्ष्य हैं, पर ये लक्ष्य अब दिख तो रहे हैं। चलिए, इन्हें थोड़ा ऊपर-नीचे कर लेते हैं। हो सकता है ये लक्ष्य 6 महीने में नहीं, अगले 9 महीने में मिलें। हो सकता है कि 25,000 के बदले 22,000 का लक्ष्य हासिल हो। लेकिन अगर ऐसा भी हो जाये, तो क्या बुरा है! (शेयर मंथन, 04 अगस्त 2009) |
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Last Updated ( Tuesday, 04 August 2009 10:09 )
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