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कंपनियों की सुर्खियाँ
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 मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और अनिल अंबानी के रिलायंस एडीए समूह के बीच नया समझौता हो गया है।
इस समझौते का मकसद दोनों समूहों के बीच आपसी सौहार्द्र, सहयोग और तालमेल का माहौल बनाना है। इसके साथ ही दोनों समूहों ने जनवरी 2006 में किये गये सभी गैर-प्रतिस्पर्धा समझौतों (नॉन-कंपीट एग्रीमेंट) को रद्द कर दिया है। इसके बदले एक नया सरल गैर-प्रतिस्पर्धा समझौता किया गया है, जो केवल गैस आधारित बिजली उत्पादन के क्षेत्र तक सीमित है। इसमें केवल यह प्रावधान रखा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज 31 मार्च 2022 तक गैस-आधारित बिजली उत्पादन के कारोबार में कदम नहीं रखेगी। लेकिन इसमें यह अपवाद रखा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज खुद अपनी जरूरतों के लिए गैस-आधारित बिजली संयंत्र लगा सकती है। यह भी कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल) उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार गैस आपूर्ति को लेकर जल्दी ही अपनी बातचीत पूरी कर लेंगे। इस नये समझौते से यह साफ है कि गैस-आधारित बिजली उत्पादन को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों में दोनों समूह अपना-अपना कारोबार फैला सकेंगे। इसका मतलब यह है कि मुकेश अंबानी का समूह दूरसंचार (टेलीकॉम) और वित्तीय सेवा जैसे क्षेत्रों में भी उतर सकेगा, जबकि दूसरी ओर अनिल अंबानी का रिलायंस एडीए समूह पेट्रोलियम या रिटेल जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू कर सकेगा। नये समझौते का उद्देश्य यह है कि गैर-प्रतिस्पर्धा के प्रावधानों के दायरे और उनकी व्याख्या को लेकर दोनों समूहों के बीच भविष्य में कोई और विवाद न खड़ा हो सके। इस नये समझौते पर रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस एडीए समूह की तमाम कंपनियों के निदेशक बोर्डों ने भी मुहर लगा दी है। (शेयर मंथन, 23 मई 2010) |
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Last Updated ( Sunday, 23 May 2010 17:14 )
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