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बायोटेक्नोलॉजी
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देश की पहली बायोटेक्नोलॉजी कंपनी बायोकॉन की स्थापना वर्ष 1978 में हुई थी।
पिछले 28 वर्षों के दौरान कंपनी एंजाइम मैन्यूफैक्चरिंग से संपूर्ण एकीकृत बायोटेक कंपनी के रूप में उभरी है। बायोकॉन अमेरिका और यूरोप को माइक्रोबायल एंजाइम का निर्यात करने वाली देश की पहली कंपनी है। कंपनी की सफलता का राज अनूठी तकनीकी और उत्पादों का विकास करने की उसकी क्षमता है। बायोकॉन की सहायक कंपनी सिंजेन इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड दवाओं की खोज और उसके विकास के शुरुआती चरण में मॉलिक्युलर आधारित शोध सेवाएँ प्रदान करती है। जबकि कंपनी की दूसरी सब्सिडियरी क्लिनिजीन डाइबिटीज के क्षेत्र में शोध कार्य करती है। जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए बायोकॉन देश में आईएसओ 9001 प्रमाणपत्र हासिल करने वाली पहली कंपनी बनी। मौजूदा समय में कंपनी पचास से अधिक देशों में अपने उत्पादों और सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कंपनी का मुख्य ध्यान डायबिटीज और आंकोलॉजी पर केंद्रित है। बायोकॉन विश्व की बड़ी 20 बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक है और नौकरियाँ देने के मामले में दुनिया में इसका सातवाँ स्थान है। साल 2008 मे बायोकॉन ने जर्मन फार्मास्युटिकल कंपनी एक्जिकॉर्प में 30% हिस्सेदारी 3 करोड़ पाउंड में खरीदी। कंपनी के प्रतिनिधि कार्यालय दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और न्यूजर्सी में स्थित हैं। कारोबारी साल 2008-09 में बायोकॉन का शुद्ध लाभ 74% घट कर 111.8 करोड़ रुपये रहा, जबकि कंपनी की आय 6% बढ़ कर 9871 करोड़ रुपये रही। |
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Last Updated ( Saturday, 04 July 2009 13:34 )
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