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डीएलएफ का तिमाही मुनाफा 4% घटा Print E-mail
News - कंपनियों की सुर्खियाँ

देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के लिए कारोबारी साल 2010-11 की पहली तिमाही सुस्त रही है।

कंपनी का तिमाही कंसोलिडेटेड मुनाफा पिछली तिमाही के 426 करोड़ रुपये से घट कर 411 करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह मुनाफे में तिमाही-दर-तिमाही करीब 4% कमी आयी है। हालाँकि अगर 2009-10 की पहली तिमाही से तुलना करें तो मुनाफे में 4% की हल्की बढ़त दिखती है। कंपनी की आमदनी लगभग सपाट रही है। यह जनवरी-मार्च 2010 के 2146 करोड़ रुपये से केवल 1% बढ़ कर 2161 करोड़ रुपये पर पहुँची। तिमाही आमदनी की साल-दर-साल तुलना करने पर 24% की बढ़त दर्ज की गयी है। डीएलएफ की एबिटा आय तिमाही-दर-तिमाही 1152 करोड़ रुपये से 3% घट कर 1112 करोड़ रुपये रह गयी।

कंपनी ने 2010-11 की पहली तिमाही में 2.42 रुपये की प्रति शेयर आय (ईपीएस) हासिल की है। इस तिमाही के लिए 2 रुपये प्रति शेयर के लाभांश (डिविडेंड) का ऐलान किया गया है। कंपनी ने बताया है कि उसके लीजिंग कारोबार में सुधार दिखने लगा है। बीती तिमाही के दौरान इसने 9.8 लाख वर्ग फुट की जगह लीज पर दी है। साथ ही 19 लाख वर्ग फुट जगह की बिक्री के लिए बुकिंग हुई है। कंपनी के पास इस समय कुल विकास योग्य जगह 41.3 करोड़ वर्ग फुट की है। हालाँकि इस तिमाही के अंत में 5.5 करोड़ वर्ग फुट की परियोजनाओं में निर्माण चालू है। बीती तिमाही में इसने 13.7 लाख वर्ग फुट की जगह ग्राहकों को सौंपी।

कंपनी ने बीती तिमाही में कुछ ऐसी संपत्तियों का विनिवेश किया, जो उसके मुख्य व्यवसाय का हिस्सा नहीं थे। इस विनिवेश से कंपनी को 294 करोड़ रुपये हासिल हुए।

कंपनी ने यह भी बताया है कि व्यावसायिक (कमर्शियल) भवनों की श्रेणी में अब भी मांग उस तरह से नहीं सुधरी है, जिस तरह से आवासीय (रेजिडेंशियल) श्रेणी में सुधार दिखा है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक सौरभ चावला का यह भी कहना है कि ऊँची महँगाई दर कुल मिला कर मांग और लागत के मामले में बुरा असर डाल रही है। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि कंपनी आने वाले समय में भी अपने मुख्य व्यवसाय से बाहर की संपत्तियों का विनिवेश करके नकदी जुटाने पर जोर देती रहेगी। (शेयर मंथन, 28 जुलाई 2010)

Last Updated ( Wednesday, 28 July 2010 22:55 )
 

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