Home राग बाजारी ए सर्किट, जरा देख ना कौन घपला कर रहा है
Banner
Banner
Banner
 
Banner
ए सर्किट, जरा देख ना कौन घपला कर रहा है Print E-mail

राजीव रंजन झा : ये मुन्ना भाई का सर्किट नहीं है, शेयर बाजार का सर्किट है। सर्किट बोले तो वह सीमा, जहाँ तक कोई शेयर या सूचकांक किसी एक दिन में ऊपर या नीचे जा सकता है।

सेबी ने अब इसी सर्किट को जिम्मेदारी दी है कि वह आईपीओ सूचीबद्ध होने (लिस्टिंग) के दिन होने वाली हेराफेरी पर लगाम कसे। हाल में सेबी ने 7 कंपनियों के आईपीओ में घोटालों पर कार्रवाई की थी। पिछले कुछ समय से कमजोर बाजार के बीच आये इन आईपीओ की सबसे खास बात सूचीबद्ध होने यानी बाजार में पहली बार उसकी खुली खरीद-बिक्री शुरू होने के दिन का भारी उतार-चढ़ाव रहा है। कभी ऐसे शेयरों ने पहले ही दिन आईपीओ भाव से 100% की बढ़त दिखायी, तो कभी भाव आधे से भी कम रह गया। इनमें कारोबार की मात्रा भी हद से ज्यादा रही। बेहद छोटी कंपनियों के शेयरों सूचीबद्ध होने के दिन उनका कारोबार बाजार के सबसे दिग्गज शेयर रिलायंस के दैनिक कारोबार से भी ज्यादा रहा।
आईपीओ नियमों में संशोधन के जरिये सेबी ने इन्हीं दो पहलुओं पर अंकुश लगाने की कोशिश की है। पहले दिन के कारोबार के लिए एक तो सर्किट की सीमा लगायी गयी है,, और दूसरे इन्हें ट्रेड फॉर ट्रेड श्रेणी में डाल कर इनमें डिलीवरी को अनिवार्य बनाया गया है, जिससे कारोबार नियंत्रित रहे। अगर इश्यू 250 करोड़ रुपये तक का हो तो उस पर 5% का सर्किट लगेगा और इससे बड़े आईपीओ के लिए 20% का सर्किट रहेगा। सर्किट के लिए आधार भाव सुबह 9 से 10 बजे तक कॉल ऑक्शन के जरिये तय होगा। यह वही प्रक्रिया है, जो सुबह 9 से 9.15 बजे तक सेंसेक्स और निफ्टी के शेयरों के लिए चलती है। दूसरे दिन से पुराने नियमों के हिसाब से कारोबार चलेगा।
लेकिन क्या इन नये नियमों से आईपीओ में गड़बड़ियाँ करने वालों पर वाकई अंकुश लग सकेगा? पहली नजर में ऐसा लगता है कि ये नियम अपना अच्छा असर डालेंगे। लेकिन चोर तो नयी तरकीबों में हमेशा ही पुलिस से एक कदम आगे रहते हैं। इसलिए आने वाले आईपीओ में ऐसे घपलेबाज कैसी नयी तरकीब अपनाते हैं, इस पर नजर रखनी होगी।
साथ ही, सर्किट अपने-आप में अचूक मंत्र नहीं है। बाजार में पहले से जिन शेयरों में खरीद-बिक्री चल रही है, उनमें भावों को चकरघिन्नी की तरह ऊपर-नीचे करने के लिए कथित ऑपरेटर इसी सर्किट का सहारा लेते हैं। सर्किट के चक्कर में ही आम निवेशक समय रहते न तो खरीदारी कर पाते हैं, न ही जरूरत पड़ने पर बाहर निकल पाते हैं। Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 23 जनवरी 2012)

Last Updated ( Monday, 23 January 2012 12:46 )
 

Add comment


कंपनियों की सुर्खियाँ

स्पष्टीकरण (disclaimer) देखें। इस वेबसाइट या किसी भी अन्य माध्यम पर शेयर मंथन के किसी भी प्रकाशन या सेवा का उपयोग इस स्पष्टीकरण के अधीन है। 

Custom Search
Copyright © 2012 Share Manthan. All Rights Reserved.
Share Manthan is owned and managed by NaradVani Sanchar Madhyam Pvt. Ltd.