|

राजीव रंजन झा : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आखिर 3 साल बाद नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती करके मौद्रिक नीति में ढील का नया चक्र शुरू कर दिया है।
बेशक, अभी इसने ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की है। बाजार अभी व्यावहारिक रूप में इसकी उम्मीद भी नहीं कर रहा था, भले ही उद्योग जगत की ओर इसकी मांग की जा रही हो। उद्योग जगत ने करीब साल भर पहले से ही अपना दर्द जताना शुरू कर दिया था कि आरबीआई महँगाई दर को नियंत्रित करने के लिए गलत दवा दे रहा है। लेकिन आरबीआई शायद अपनी सोच और अपनी मजबूरियों के चलते वही दवा ज्यादा लंबे समय तक चलाता रहा। लेकिन अब उस बात से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आखिरकार आरबीआई ने अपने रुख में बदलाव कर लिया है। इस बदलाव का साफ संकेत पिछली समीक्षा में ही दे दिया गया था। अब उसके रुख में बदलाव कार्य रूप में भी दिखने लगा है। आरबीआई के आज के फैसले के तुरंत बाद बाजार में जो उछाल दिखी और निफ्टी 5100 के पास चला आया, उसका कारण यही है कि बाजार सीआरआर में कटौती को लेकर भी असमंजस में था। लिहाजा जब यह कटौती कर दी गयी तो बाजार न केवल इस बात पर खुश हो गया, बल्कि अब शायद यह उम्मीद भी हो चली है कि ब्याज दरों में कटौती भी संभवत: मार्च से ही शुरू हो जाये। आरबीआई ने मार्च 2010 के बाद से लगातार 13 बार ब्याज दरें बढ़ायीं और पिछले साल अक्टूबर तक यह सिलसिला चला। अक्टूबर के बाद से दरों में यह बढ़ोतरी रुक गयी और अब दरों में कटौती का रास्ता भी खुलता दिख रहा है। अगर मार्च नहीं तो अप्रैल तक यह कटौती शुरू हो जानी चाहिए। शायद आरबीआई ने दरों में कटौती के लिए अभी रुकने का फैसला इस वजह से भी किया हो कि वह पहले बजट का इंतजार करना चाहता हो। बजट में कैसे प्रस्ताव आते हैं, उनकी वजह से सरकारी खजाने पर कैसा असर पड़ता है और उनकी वजह से विकास और महँगाई दर के बारे में कैसी संभावनाएँ बनती हैं, यह सब देखने के बाद शायद आरबीआई अपनी आगे की योजना बनाना चाहे। फिलहाल बाजार को अपनी मौजूदा बाधाओं से कुछ आगे बढ़ने का एक बहाना मिल गया है। लेकिन अगर निफ्टी 5200-5250 के आसपास तक जा सका तो वहाँ काफी सावधान रहने की जरूरत होगी। वहाँ से आगे जाने पर बड़ी उछाल मिल सकती है और बाजार एकदम से टपक भी सकता है। Rajeev Ranjan Jha (शेयर मंथन, 24 जनवरी 2012) |
|
Last Updated ( Tuesday, 24 January 2012 12:01 )
|
Comments
unka bataya huaa target to aag gya
RSS feed for comments to this post