|
राजीव रंजन झा : बीते 5 हफ्तों से अमेरिकी बाजार भी ऊपर चल रहा है और भारतीय बाजार भी।
लेकिन इन 5 हफ्तों में या कह लें कि इस साल की शुरुआत से बीते शुक्रवार 3 फरवरी तक निफ्टी 701 अंक या 15.2% की उछाल दिखा चुका है। आज सुबह भी मजबूती दिख रही है और अब निफ्टी अक्टूबर 2011 के शिखर 5400 के बेहद करीब आ चुका है। इस बीच अमेरिकी बाजारों की सुर्खियाँ बता रही हैं कि बीते शुक्रवार को डॉव जोंस मई 2008 के बाद से अब तक के सबसे ऊपरी स्तर पर बंद होने में सफल रहा। साल के इन्हीं शुरुआती 5 हफ्तों में डॉव जोंस की तेजी 5% से कुछ ज्यादा रही है, जबकि नैस्डैक कंपोजिट इसी दौरान 11% से ज्यादा उछल चुका है। इन 5 हफ्तों में भारतीय बाजार की चाल ज्यादा तेज रही, लेकिन इसे बीते साल भारतीय बाजार में वैश्विक बाजारों से कहीं ज्यादा कमजोरी के संदर्भ में देखा जा सकता है। बीते साल सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग 25% का नुकसान सहा, जबकि अमेरिकी बाजार में लगभग 5-6% की बढ़त ही रही थी। इस साल की शुरुआत से वैश्विक तेजी के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी लगातार जारी रहने का भी असर साफ है। जनवरी में 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध खरीदारी करने के बाद एफआईआई ने फरवरी में भी अपनी जोरदार खरीदारी का सिलसिला जारी रखा है। यह बात बिना शक कही जा सकती है कि जब तक उनकी ओर से ऐसी बड़ी खरीदारी चलती रहेगी, भारतीय बाजार की तेजी नहीं रुकेगी, भले ही हमें सेंसेक्स और निफ्टी के स्तर जितने भी चौंकाने वाले लगते रहें। लेकिन जरा सावधान रहें। एफआईआई की खरीदारी का यह दौर शुरू होने के समय डॉलर का भाव 53-54 रुपये के पास चला गया था। अब यह वापस 49 रुपये के नीचे है। इसलिए एफआईआई को डॉलर के ऊँचे भाव का जो फायदा जनवरी की शुरुआत में मिल रहा था, वह अब बाकी नहीं रहा। निफ्टी अक्टूबर 2011 के शिखर के पास है। जब तक यह शिखर पक्के तौर पर पार नहीं होता, तब तक नवंबर 2010 से चल रही कमजोरी का दौर पूरा होने का पक्का भरोसा नहीं बनेगा। लेकिन अगर वाकई निफ्टी की रेल 5400 के स्टेशन से आगे बढ़ने लगी तो निवेशकों में ट्रेन छूटने की हड़बड़ाहट मचेगी। यह हड़बड़ाहट निफ्टी को उसी झटके में करीब 5700 तक तो ले ही जायेगी। लेकिन ध्यान रखें, बाजार छका भी सकता है। Rajeev Ranjan Jha (शेयर मंथन, 06 फरवरी 2012) |
|
Last Updated ( Monday, 06 February 2012 11:07 )
|
Comments
RSS feed for comments to this post