Home राग बाजारी जागो प्यारे, राजनीति समझना आसान नहीं
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जागो प्यारे, राजनीति समझना आसान नहीं Print E-mail

राजीव रंजन झा : मारक मेहता मुदित थे और रह-रह कर कभी अपने उल्टे चश्मे को सँभालते तो कभी उनकी अंगुलियाँ ट्रेडिंग टर्मिनल के की-बोर्ड से खेलने लगतीं। तभी नारायण-नारायण की ध्वनि गूँजी।

मुनिवर ने प्रवेश किया। मारक का हाल देख कर पूछे, बड़े प्रसन्न हो मारक, कोई खजाना मिल गया क्या! मारक मेहता बोले, प्रभु, मुझे भविष्य दिख गया है। बाजार में भविष्य दिख जाये तो खजाना मिल ही जाता है। देखा नहीं, हाल में कितनी तेजी से बाजार चला है!
मुनिवर चकराये कि भविष्य देखना तो मेरा काम है, मारक ने कब से यह काम शुरू कर दिया। पूछे, अरे वत्स! कौन सा भविष्य दिख गया है तुम्हें? पुलकित मारक ने कहा, मुझे भारत का भविष्य दिखा है। प्रभु, पहले तो उत्तर प्रदेश में राहुल भैया अपनी मनचाही सरकार बनवायेंगे। उसके बाद वे 2014 की भी लड़ाई जीतेंगे। उसके बाद प्रियंका दीदी भी मैदान में आयेंगी। इन दोनों की मदद करने के लिए ‘जीजा जी’ भी मोटरसाइकल पर सवार सुपरमैन की तरह जंग में कूदेंगे। इन तीन महारथियों के सामने पूरा राजनीतिक मैदान साफ हो जायेगा। मुझे तो उसके आगे भी कुछ नन्हे-मुन्हे दिख रहे हैं, जिनके सिर पर अभी से मुकुट पड़ा है। वे ही भारत के भविष्य हैं।
लेकिन वत्स मारक, मुनिवर ने पूछा, आपके ‘जीजा जी’ ने तो कुछ और भविष्यवाणी की है। वे तो कह रहे हैं कि अभी राहुल कालम है। इसके बाद प्रियंका का समय आयेगा। उसके बाद परिवार के दूसरे लोग आयेंगे। आपके जीजा जी खुद भी राष्ट्र की सेवा करेंगे, अगर जनता चाहेगी। तो वत्स, अगर राहुल का समय पूरा होने के बाद प्रियंका का समय आने वाला है, तो इस बात का मतलब क्या निकलता है? और उनका समय कब तक रहने वाला है?
अब मारक चकराये। यह सब तो सोचा ही नहीं था। उन्हें तो बस प्रियंका दीदी की विरोधियों को चुनौती देने वाली यह पुकार सुनाई दे रही थी, मैं राजनीति में आऊँ क्या? अचानक मारक मेहता की दृष्टि चकरायी। उन्हें दिखा कि प्रियंका यह पुकार तो राहुल भैया के सामने लगा रही हैं - मैं आऊँ क्या? और भैया कोई जवाब ही नहीं दे रहे। अगले ही पल दृश्य बदला और एक मोटरसाइकल रैली दिखी। मोटरसाइकिलें नजदीक आयीं तो मारक चौंके, अरे यह क्या? यह चेहरा तो पाकिस्तान में दिखता है। अरे हाँ, जरदारी। लेकिन यह उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार कैसे कर रहा है? मारक मेहता का सिर घूमा और आँखें खुल गयीं। अरे, मुनिवर कहाँ गये? Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 07 फरवरी 2012)

Last Updated ( Tuesday, 07 February 2012 10:38 )
 

Comments  

 
0 #1 sanjiv kumar 2012-02-07 11:04
:lol: Jha jee maza aagaya rajniti par ap ka coments best hota hai
bazar par nahi
Quote
 

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