Home राग बाजारी बाजार का इंतजार : चाय के प्याले से होठों की दूरी
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बाजार का इंतजार : चाय के प्याले से होठों की दूरी Print E-mail

राजीव रंजन झा : आप किसी से कहें कि निफ्टी 5400 के ऊपर निकल जाने के बाद ही बाजार में आगे की तेजी के बारे में सोचा जाये, तो प्रश्न उठता है कि ये स्तर अब दूर ही कितने हैं?

निफ्टी 5400 को तो पिछले 4 दिनों से छूने और पार करने की कोशिश कर रहा है। कल यह इसके ऊपर बंद होने में सफल भी रहा। फिर कहाँ अटक रही है गाड़ी? क्यों निफ्टी का 5450 के ऊपर निकलना बाजार की अगली चाल के लिए इतना महत्वपूर्ण लग रहा है? किसी की टिप्पणी मिली कि तकनीकी विश्लेषण में चाय का प्याला होठों के करीब आ जाये, तब भी वह दूर ही लगता है। जी हाँ, बाजार मिजाज ही कुछ ऐसा है। जब तक प्याला होठों को छू न ले, तब तक वह वास्तव में दूर ही है और आप नहीं मान सकते कि चाय पीने का काम पूरा हो गया!
मैंने 31 जनवरी की सुबह ही लिखा था कि “जब तक निफ्टी 5400 के भी ऊपर न निकले, तब तक मुझे भरोसा नहीं होगा कि ये बाधाएँ कट गयी हैं।” उस समय निफ्टी 5200 के पास था। इसके बाद 6 फरवरी की सुबह मैंने फिर लिखा कि जब तक 5400 का अक्टूबर 2011 का शिखर पक्के तौर पर पार नहीं होता, तब तक नवंबर 2010 से चल रही कमजोरी का दौर पूरा होने का पक्का भरोसा नहीं बनेगा। उस दिन निफ्टी 5400 से कुछ पहले ही 5390 पर अटका और अब तक 5400 के ऊपर-नीचे झूल रहा है।
मैंने पहले कई बार लिखा है कि जब भी निफ्टी नवंबर 2010 से चल रही गिरती पट्टी की ऊपरी रेखा पार करेगा तो एक बड़ी उछाल की उम्मीद बनेगी। लेकिन जब वाकई निफ्टी इस रेखा को पार कर चुका है, मेरे मन में ठीक ऊपर की यह बाधा इस तरह क्यों अटक गयी है? अब यह 5400-5450 पार करने की भी नयी शर्त क्यों लग गयी है? चाय का प्याला होठों के इतने करीब है, फिर मन में यह शक क्यों? अब देख लीजिए, सरपट ऊपर भागते बाजार में निफ्टी का चार्ट ठीक 5400 पर ही क्यों अटक गया?
वजह मैंने पहले भी समझायी थी। बाजार जब भी किसी महत्वपूर्ण मुकाम पर होता है, नयी उछाल या बड़ी गिरावट के लिए खुद को तैयार कर रहा होता है, उस समय वह जम कर छकाता है। अगर निफ्टी की ट्रेन 5400 के स्टेशन से भी आगे बढ़ने लगे तो बाजार की सवा साल से जारी गिरावट खत्म होने के दो बड़े साफ संकेत मिल जायेंगे। नवंबर 2010 से चल रही पट्टी तो कट ही चुकी है। निचले शिखर बनने का सिलसिला भी 5400 पार होने पर टूट जायेगा। लेकिन गाड़ी स्टेशन से आगे तो बढ़ने दें! Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 10 फरवरी 2012)

Last Updated ( Friday, 10 February 2012 10:54 )
 

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