Home राग बाजारी आ गये दूरसंचार के नये सरकारी विचार
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आ गये दूरसंचार के नये सरकारी विचार Print E-mail

राजीव रंजन झा : गनीमत है कि दूरसंचार को लेकर सरकार के नये नियमों पर अभी कोई तकरार शुरू होती नहीं दिखी है।

ये नये नियम भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया वगैरह पुराने जमे-जमाये ऑपरेटरों को राहत देने वाले हैं, इसलिए उन्होंने इसका स्वागत ही किया है। ये नये नियम अप्रैल 2012 में घोषित होने वाली नयी टेलीकॉम नीति की रूपरेखा को और स्पष्ट करते हैं।
नये ऑपरेटरों का खेमा तो अपने भविष्य को लेकर ही आफत में है, वह इन बारीकियों पर ध्यान देने के बदले अपना अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में लगा है। ताजा खबर यह है कि टेलीनॉर अब यूनिटेक का साथ छोड़ने की तैयारी कर रही है और नये साझेदार की तलाश में है। लेकिन जब तक यूनिनॉर को लाइसेंस रद्द होने के मामले में राहत नहीं मिलती या फिर से नये लाइसेंस नहीं मिलते, तब तक कोई कंपनी उसकी नयी साझेदार क्यों बनेगी?
खैर, अब सरकार कह रही है कि लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम नहीं मिलेगा। यह फैसला 2003 में ही हो जाना चाहिए था, जब आम टेलीफोन, मोबाइल वगैरह सारी संचार सेवाओं के लिए एकीकृत यानू यूनिफाइड लाइसेंस की शुरुआत की गयी थी। मगर उस समय यह मसला उठता कि यूनिफाइड लाइसेंस की कीमत सेलुलर लाइसेंस के बराबर रखी गयी। सेलुलर लाइसेंस पाने वालों को लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम मिला था। फिर उस समय जो कंपनी अतिरिक्त शुल्क दे कर कोई कंपनी यूनिफाइड लाइसेंस लेती, उसे स्पेक्ट्रम नहीं देना गलत नहीं होता क्या?
आज की स्थिति में सबसे सही विकल्प यही है कि स्पेक्ट्रम लाइसेंस से अलग हो और उसे पाने के लिए नीलामी में बोली लगाना ही एकमात्र तरीका हो। अब इस बात का इंतजार है कि इस नीलामी की प्रक्रिया कैसी रखी जाती है और कब शुरू की जाती है। जैसे संकेत हैं, टीआरएआई इस बारे में अगले दो हफ्तों में विचार-पत्र (कंसल्टेशन पेपर) ला सकता है। हालाँकि टीआरएआई और सरकार पर इस प्रक्रिया को तेज गति से चलाने का दबाव होगा, खास तौर पर उन नये ऑपरेटरों की ओर से, जिनके लाइसेंस सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द किये हैं। आगे चल कर लाइसेंसों के नवीकरण के समय कीमत तय करने का मुद्दा भी अहम रहेगा। Rajeev Ranjan Jha
(शेयर मंथन, 16 फरवरी 2012)

Last Updated ( Thursday, 16 February 2012 14:12 )
 

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