 राजीव रंजन झा : जनवरी के पहले हफ्ते से भारतीय शेयर बाजार में तेजी चल रही है और इस पूरी तेजी के दौरान म्यूचुअल फंड लगातार बिकवाल ही रहे हैं।
पहली नजर में लगता है कि वे बाजार की इस तेजी को समझने और उसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। लेकिन आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक ताजा रिपोर्ट में कुल 334 म्यूचुअल फंड इक्विटी योजनाओं में से 194 योजनाओं का बीते 1 महीने का लाभ इस दौरान सेंसेक्स की 9.8% बढ़त से ज्यादा रहा। दूसरी ओर केवल 140 योजनाओं ने सेंसेक्स से धीमा प्रदर्शन किया। यानी ज्यादा संभावना यही है कि बीते एक महीने के दौरान आपके फंड मैनेजर ने आपको बाजार से बेहतर फायदा दिलाया। चाहे बेच कर या खरीद कर, उससे क्या फर्क पड़ता है? अक्सर पहली नजर में ऐसा दिखता है कि म्यूचुअल फंड भारतीय बाजार को गिरावट के समय सहारा देने का फर्ज निभाने की कोशिश करते हैं और जैसे ही बाजार थोड़ा चढ़ता है, वैसे ही मुनाफावसूली के लिए बेताब हो जाते हैं। लेकिन यह केवल बाजार को कमजोरी के दौरान सहारा देने का फर्ज निभाना नहीं है, बल्कि एक शानदार निवेश रणनीति भी है। आखिर एक निवेशक का काम क्या है? सस्ते दाम पर खरीदना और जब अच्छे भाव मिलें तो बेच कर मुनाफा कमाना, यही ना! म्यूचुअल फंड हर बार इस रणनीति में सफल रहे हों, ऐसा भी नहीं है। वरना बाजार में हाल की उछाल के बाद भी उनकी 74 इक्विटी योजनाएँ का बीते एक साल के लिहाज से नुकसान में नहीं होतीं। आखिर म्यूचुअल फंड फरवरी 2011 में खरीदारी कर रहे थे, जब सेंसेक्स 17,290-18690 के दायरे में था। मगर सितंबर-अक्टूबर 2011 में सेंसेक्स 15,745-17,908 पर रहने के दौरान वे बिकवाली कर रहे थे। टॉरस म्यूचुअल फंड के एमडी आर के गुप्ता से बात की तो उन्होंने अनुमान जताया कि कई म्यूचुअल फंड अभी शायद अपने उन निवेशकों की ओर से पैसा निकाले जाने (रिडेंप्शन) का दबाव भी झेल रहे होंगे, जो बीते 2 सालों से खुद को फंस गया मान रहे थे। इसके अलावा म्यूचुअल फंडों में आम धारणा यह है कि मार्च में बजट के आसपास मुनाफावसूली के चलते गिरावट आयेगी। आर के गुप्ता का तो मानना है कि अब एफआईआई के लिए भी मुनाफावसूली का अच्छा मौका बन चुका है, और यह अलग बात है कि उनकी मुनाफावसूली 1 दिन बाद शुरू होगी या 1 हफ्ते बाद। Rajeev Ranjan Jha (शेयर मंथन, 21 फरवरी 2012) |