 राजीव रंजन झा : दो हफ्ते पहले निफ्टी 5300-5400 के बीच था, और कल 7 महीने बाद पहली बार यह 5600 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
लेकिन कल जी बिजनेस पर मेरे कार्यक्रम में 4 में से 1 विश्लेषक ने अगले 2 हफ्तों की ऊपरी सीमा 5650 मानी, 1 ने 5700 मानी और 2 ने मोटे तौर पर 5800 मानी। जब निफ्टी 4531 से चढ़ कर 5622 तक की छलांग लगा चुका हो, लगभग हर दिन नये ऊपरी शिखर बन रहे हों, उस वक्त विश्लेषकों का यह संकोच आपको कुछ हैरत में नहीं डालता? नहीं, यह संकोच स्वाभाविक है। जब बाजार एक झटके में 24% उछल चुका हो, तब विश्लेषक कैसे यहाँ से और आगे 5-10% ऊपर के स्तरों की बात करें?  अगर हम निफ्टी के नवंबर 2010 के शिखर 6339 से दिसंबर 2011 की तलहटी 4531 तक गिरावट की वापसी (रिट्रेसमेंट) देखें, तो 50% वापसी 5435 पर थी। नवंबर 2010 से चली आ रही गिरती पट्टी के ऊपर निकल जाने के बाद भी मैं इस बात पर जोर दे रहा था कि यह स्तर पार होने के बाद ही बाजार की तेजी आगे बढ़ने का पक्का भरोसा बनेगा। जब निफ्टी 5200 के स्तर को पार करने की कोशिश कर रहा था, तब 1 फरवरी की सुबह मैंने लिखा था, “यह स्तर (5222) पार करने पर 50% वापसी यानी 5435 अगला लक्ष्य बनेगा। इसके करीब ही अक्टूबर 2011 का शिखर 5399 है। अगर निफ्टी ने इस पूरी गिरावट का 50% से भी ज्यादा वापसी कर ली, तब जाकर भरोसा होगा कि बाजार में कमजोरी का दौर खत्म हो गया।” आगे हमने देखा कि 5222 पार करने के बाद निफ्टी को 5400 तक जाने में केवल 3-4 कारोबारी दिन लगे, लेकिन वहाँ से बस एक कदम दूर 5435 पार करने में इसे 5-6 दिन लग गये। लेकिन 5435 की बाधा को निफ्टी ने जब पार किया तो एक झटके में ऊपरी अंतराल (राइजिंग गैप) के साथ पार किया। अब निफ्टी इसी संरचना के अगले पड़ाव यानी 61.8% वापसी के स्तर 5648 के पास आ चुका है। अब फिर वही बड़ा सवाल – क्या निफ्टी इस बाधा को पार कर पायेगा? मन में संदेह उठना गैरवाजिब नहीं है। लेकिन ध्यान रखें कि बाजार ने अब तक कमजोरी या थकान के संकेत नहीं दिये हैं। जनवरी से अब तक की तेजी में सबसे बड़ा योगदान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी का रहा है और कल भी उन्होंने नकद श्रेणी में 1400 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। ऐसे में एक बड़ी बाधा से पहले सावधान रहना ठीक है, लेकिन जब तक बाजार वापस पलटने के स्पष्ट संकेत न दे, तब तक इस तेजी के विपरीत जाना खतरनाक भी हो सकता है। क्या बाजार के सामने यहाँ से पलटने की वजहें नहीं हैं? बेशक हैं। सबसे पहली और सबसे बड़ी वजह तो यही है कि 24% की बढ़त केवल डेढ़ महीने में आ चुकी है। इसलिए मुनाफावसूली का दौर किसी भी समय शुरू हो सकता है। लेकिन बाजार 24% बढ़त पर क्यों रुकेगा, 30% पर क्यों नहीं, 40% पर क्यों नहीं, या पहले 20% पर ही क्यों नहीं रुक गया? यहाँ जरा याद दिला दूँ कि मार्च 2009 में भी जब बाजार ने नयी चाल पकड़ी थी, तो 6 मार्च 2009 की तलहटी 2539 से चढ़ कर 6 मई 2009 को 3717 तक गया था। यानी तब ठीक 2 महीनों में यह 46.4% उछला था। और हाँ, लगे हाथ अपनी पीठ भी ठोक लूँ! मैंने 23 नवंबर 2011 को लिखा था, “बाजार की कई बातें अभी मार्च 2009 की याद दिला रही हैं। बात केवल इतनी नहीं है कि मार्च 2009 में रुपये ने डॉलर की तुलना में अपना ऐतिहासिक निचला स्तर छू लिया था और अब भी रुपया डॉलर की तुलना में ऐतिहासिक निचले स्तर पर है। दरअसल बाजार में निराशा अपने चरम पर है। यह निराशा मुझे मार्च 2009 की ज्यादा याद दिलाती है।” तब मैंने यह सवाल अक्सर उठाया था कि क्या मार्च 2009 की याद आ रही है? लोग मना कर रहे थे। शायद मैं मार्च 2009 की याद दिलाने में उचित समय से 4-5 हफ्ते आगे था। बाजार ने तलहटी नवंबर 2011 के अंत में नहीं, बल्कि दिसंबर 2011 के अंत में बनायी। लेकिन अब तो शायद काफी लोगों को वह समय याद आ रहा होगा... Rajeev Ranjan Jha (शेयर मंथन, 22 फरवरी 2012) |