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बुधवार को मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय बाजार में मुनाफावसूली का दौर रहा जिससे सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) दोनों प्रमुख सूचकांकों को करीब डेढ़ से पौने दो फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा।
बीएसई (BSE) का सेंसेक्स 283 अंक या 1.54% गिर कर 18,145 पर बंद हुआ। एनएसई (NSE) के निफ्टी को भी 102 अंक या 1.82% की चोट लगी और यह फिसल कर 5505 पर आ गया। इस साल 30 जनवरी के बाद यह भारतीय बाजार की दूसरी सबसे तीखी गिरावट है। छोटे-मँझोले सूचकांकों पर कहीं ज्यादा भारी मार पड़ी। एनएसई का सीएनएक्स मिडकैप 3.81% लुढ़का। वहीं बीएसई मिडकैप में 3.46% कमजोरी रही। बीएसई स्मॉलकैप भी 3.24% गिर गया। आज सुबह बाजार ने शुरुआत तो हरे निशान में की, लेकिन पहले घंटे में ही यह लाल निशान में आ गया। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 5630 तक चढ़ने के बाद फिसलने लगा और करीब 11 बजे तक 5575 पर आ गया। इस स्तर पर इसे दो बार सहारा मिला, लेकिन दोपहर में हरे निशान में लौटने की इसकी कोशिश नाकाम हो गयी। वहीं यूरोपीय बाजारों ने सपाट शुरुआत के बाद कमजोरी का रुख पकड़ लिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखा। करीब डेढ़ बजे यह 5600 के आसपास था, जहाँ से फिसल कर यह आखिरी मिनटों में 5491 तक गिर गया। अंत में यह 5500 के थोड़ा ऊपर बंद हो पाया। जैसे ही कारोबारियों ने यह महसूस किया कि बाजार की चाल अटक रही है, उन्होंने मुनाफावसूली की ओर भागना ठीक समझा क्योंकि बाजार में बीते 7 हफ्तों से जोरदार तेजी रही है। आज की गिरावट में सबसे ज्यादा मार रियल एस्टेट क्षेत्र पर पड़ी। बीएसई का रियल्टी सूचकांक पर 6.77% टूटा। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.93%, मेटल 4.29%, बैंकेक्स 3.82%, पावर 3.75%, पीएसयू 2.71%, कैपिटल गुड्स 2.35% और ऑटो 1.55% नुकसान पर रहे। इसके अलावा हेल्थकेयर में 0.80%, तेल-गैस में 0.78%, टीईसीके में 0.62% और एफएमसीजी में 0.58% की कमजोरी रही। आईटी अकेला ऐसा सूचकांक रहा जो हरे निशान में टिक पाया। इसमें 0.45% की हल्की बढ़त रही। हालाँकि दिलचस्प पहलू यह है कि बाजार की इस तीखी गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी जारी रही। बीएसई और एनएसई के आँकड़ों के मुताबिक एफआईआई ने बुधवार के कारोबार में नकद श्रेणी में 830 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। हालाँकि उनकी तुलना में आज घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,333 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की। (शेयर मंथन, 22 फरवरी 2012) |