राजीव रंजन झा
करीब 2 हफ्ते से बाजार में मचे घमासान में क्या विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और घरेलू संस्थाओं के योद्धा अब थकने लगे हैं? शायद सोमवार के आँकड़े इस बात का पहला संकेत दे रहे हैं।
एनएसई के आँकड़ों के मुताबिक कल एफआईआई ने 495 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थाओं ने 200 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी। इस लिहाज से दोनों खेमों ने पाले नहीं बदले हैं। एफआईआई 19 जनवरी से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। घरेलू संस्थाएँ उसी दिन से लगातार खरीदारी कर रही हैं। जैसे-जैसे एफआईआई बिकवाली बढ़ती गयी, वैसे-वैसे घरेलू संस्थाओं की खरीदारी का जोर भी बढ़ता गया। इस घमासान की हद दिखी 28 जनवरी को, जब एफआईआई ने 2813 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की तो जवाब में घरेलू संस्थाओं ने 1980 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर डाली। लेकिन उसके बाद अगले दिन शुक्रवार 29 जनवरी को एफआईआई बिकवाली घट कर 996 करोड़ रुपये रह गयी। हालाँकि जवाब में घरेलू संस्थाओं की खरीदारी 1011 करोड़ रुपये की रही। क्या यह इस बात का साफ संकेत था कि एफआईआई सेना पीछे हटने लगी है? अब सोमवार के आँकड़े शायद इसी सोच को पुख्ता बनायेंगे। अगर एफआईआई बिकवाली रुक गयी, तो शायद भारतीय बाजार को एक बड़ी राहत मिलेगी और इससे यह अचानक एक छलांग लगा सकता है। लेकिन तेजी की उम्मीद रखने वालों को अभी सावधान रहने की जरूरत है। निफ्टी के चार्ट पर बन रहे जिस प्रतिबिंब की बात मैंने कई बार की है, उसे अगर सच साबित होना है तो आने वाले दिनों में बाजार ऊपर-नीचे दोनों तरफ बुरी तरह झूलता नजर आ सकता है। उसी तरह मंदी की धारणा रखने वाले भी एफआईआई बिकवाली के सहारे कोई बड़ा भरोसा न बांधें। एफआईआई बिकवाली केवल अंतरराष्ट्रीय कारणों और कारोबारी नजरिये से हो रही है। इन दोनों बातों पर समीकरण बदलते ही एफआईआई फिर से तेज खरीदार बन जा सकते हैं। रोजमर्रा के सौदों के लिहाज से विश्लेषक निफ्टी के हर 30-50 अंक पर समर्थन और बाधा के स्तर बताते रहेंगे। लेकिन जब बाजार अपनी अगली चाल के लिए मन बना लेगा तो ये सारे स्तर तेज चाकू के आगे कागज की दीवारों जितने मजबूत ही साबित होंगे। फिलहाल आप मुझसे पूछें कि क्या निफ्टी 5300 पर वापस लौट सकता है, तो मेरा जवाब होगा – हाँ। लेकिन अगर आप पूछें कि क्या यह 4500 की ओर लुढ़क सकता है तो उसका जवाब भी हाँ ही होगा। और अगर आपने पूछ लिया कि कहीं यह फिर से छोटे दायरे में फंस तो नहीं जायेगा, तो मेरा यही कहना होगा कि हाँ, मुमकिन है। जनाब, बाजार जब अपना मन नहीं बना रहा तो क्या करें! आप तो बस इन तीनों स्थितियों के लिए तैयार रहें, किसी भी संभावना को एकदम से नकार कर न चलें। (शेयर मंथन, 02 फरवरी 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 02 February 2010 08:16 )
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