Home राग बाजारी करीब आ रहा है लालची बनने का समय
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करीब आ रहा है लालची बनने का समय Print E-mail

राजीव रंजन झा

सुना सबने है, कहते सभी हैं, लेकिन इसे कर पाना बड़ा मुश्किल होता है।

फिर भी आपको याद दिला देना मेरा काम है। बाजार का एक बड़ा प्रसिद्ध मंत्र है कि जब सभी लालच में पड़ रहे हों तो आपको डरना चाहिए, और जब सभी डर रहे हों तो आपको लालच करना चाहिए। बाजार में डर के अतिरेक का समय फिर से आता दिख रहा है। आज सुबह के अंतरराष्ट्रीय संकेत इतना तो पक्का कर रहे हैं कि भारतीय बाजार भी एक बड़ी गिरावट के साथ खुलेगा। गुरुवार का कारोबार भारतीय बाजार के मनोबल को पहले ही कमजोर कर चुका है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिला झटका भारतीय बाजार एकदम से नीचे की ओर धकेलेगा। इसी समय भारतीय शेयर बाजार के अंदरुनी दम-खम की परीक्षा भी होगी। अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद भारतीय बाजार ज्यादा नहीं टूटा, या शुरुआती गिरावट के बाद सँभल गया तो इसका मतलब होगा कि बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आयेगी। अगर गिरावट आयेगी भी तो टिकेगी नहीं।
निफ्टी के लिए पहले तो 4800 के स्तर पर ही सहारे की उम्मीद बन सकती थी, लेकिन वह स्तर तो शायद शुरुआती झटके में ही टूट जाये। इसके बाद 29 जनवरी की तलहटी यानी 4766 का स्तर सामने होगा। बेहद छोटी अवधि के लिए यह देखना होगा कि आज बाजार को कहाँ सहारा मिलता है। अगर बाजार बड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद 4800 के ऊपर लौटने या बंद होने में कामयाब होता है, तो इससे मजबूती की उम्मीद बनेगी। लेकिन इसके नीचे जाने पर लोगों की नजर में 4500-4600 के स्तर भी हैं।
पिछले 2-3 दिनों से एफआईआई बिकवाली का जोर घटता दिख रहा था। आज उनकी बिकवाली कितनी रहती है, यह बात बाजार की अगली दिशा के बारे में काफी कुछ कहेगी। साथ ही घरेलू संस्थाओं का जवाब कैसा रहता है, यह भी देखना होगा। लेकिन ये सारे आँकड़े तो शुक्रवार का कारोबार बंद होने के बाद ही मिलेंगे। इसलिए शुक्रवार को ज्यादा आक्रामक होने के बदले बाजार का रुख देखना बेहतर हो सकता है।
एफआईआई बिकवाली, अंतरराष्ट्रीय बाजारों का दबाव और बजट से पहले बाजार की बेचैनी – इन सब बातों को मिला कर देखें तो बाजार में किसी भी समय अचानक बदहवासी का हाल बन सकता है। आप घात लगा कर उस मौके का इंतजार करें, क्योंकि अगर वैसी कोई बदहवासी बाजार में आयेगी तो आपको सोचने का ज्यादा मौका नहीं देगी। बस इतना ध्यान रखें कि आपके लालची बनने के बाद भी बाजार आपको और डरा सकता है। ऐसा कोई निवेश न करें, जिसे कुछ महीनों या सालों तक रखना मुश्किल हो। उधारी पर सौदे तो बिल्कुल नहीं! (शेयर मंथन, 05 फरवरी 2010)

Last Updated ( Friday, 05 February 2010 08:26 )
 

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