चेतन शर्मा, सलाहकार संपादक, ज़ी बिजनेस
जरूरत है जरूरत है जरूरत है, एक खरीदार की एक लेनदार की
सेवा करे जो बाजार की कहते हैं जानकार कि हर गिरावट में करो खरीदारी लेकिन लगातार गिरावट में क्या है इसमें समझदारी गिरने पर कहते हैं थोड़ी थोड़ी कर सकते हो और उसके बाद क्या मर सकते हो कहना है आसान पर करना मुश्किल गिरते बाजार में कमजोर पड़ता है दिल कहते हैं लंबी अवधि में तो अच्छा रहेगा हमने कहा तब तक कौन बचा रहेगा बिगड़ने के बाद कैसे कुछ बने जब नहीं बचेंगे दांत तो कैसे खायेंगे चने और वैसे भी कहाँ खत्म हुई वैश्विक परेशानी पता लगेगा तब जब सर से ऊपर होगा पानी अमरीका के बाद अब यूरोप की है यह कहानी जबकि चीन की तो चल रही है अपनी मनमानी बस स्टिमुलस के नोट छाप कर नहीं होता विकास चाहिये असली माँग बाकी सब है बकवास तो ऐसे में आयेंगे भारी गिरावट के बाद लगेंगे कुछ तेजी के झटके सरकार कहेगी बैंकों को “खरीदो” एनटीपीसी पर नहीं रहो अटके तब तक हर इजाफा देगा निकलने का मौका क्योंकि उम्मीद के बाद ही होता है धोखा (शेयर मंथन, 08 फरवरी 2010) |
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Last Updated ( Monday, 08 February 2010 08:56 )
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