राजीव रंजन झा
बजट आने से पहले शुक्रवार की सुबह मैंने मोटे तौर पर अपने 7 पैमाने बताये थे।
पहला पैमाना था उत्पाद (एक्साइज) शुल्क का, जिस पर वित्त मंत्री ने बाजार के अनुमानों से कम ही बोझ डाला। दूसरा पैमाना था सेवा कर (सर्विस टैक्स) मुझे लग रहा था वित्त मंत्री इन शुल्कों को बढ़ाते समय थोड़ा संयम दिखायेंगे और वैसा ही बजट में सामने आया। तीसरा पैमाना था गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का। इसे अप्रैल 2011 से लागू करने का साफ संकेत मिलना सकारात्मक है। चौथा पैमाना था प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) का। वैसे तो तो आम आदमी की बातें करने वाली इस सरकार ने आयकर (इन्कम टैक्स) में राहत केवल खास लोगों को दी है। आयकर के वर्गों (स्लैब) में जो बदलाव किये गये हैं, उनका फायदा सालाना 3 लाख रुपये से ज्यादा आमदनी वाले लोगों को ही मिलेगा। उन्हें आम आदमी माना जाये या खास, यह आप ही तय कर लें। खैर, आम आदमी को राहत न मिलने के पहलू को नजरअंदाज कर दें तो ये बदलाव अच्छे हैं। लेकिन मैट (मिनिमम ऐल्टरनेटिव टैक्स या न्यूनतम वैकल्पिक कर) की दर का बढ़ना काफी कंपनियों को अखरेगा। मेरा पाँचवाँ पैमाना था सरकारी घाटे का। यहाँ वित्त मंत्री मुझे सुविधाजनक स्थिति में दिख रहे थे और इसीलिए उन्होंने शिकायत का मौका नहीं दिया। छठा पैमाना था विनिवेश का। उम्मीद के मुताबिक ही उन्होंने इस बजट में विनिवेश का लक्ष्य बड़ा रखा है। मेरा सातवाँ पैमाना था भविष्य के बारे में एक बड़ी दृष्टि का। यह दृष्टि सामने नहीं आ सकी इस बजट में। और इसीलिए यह बजट साल भर का हिसाब-किताब ज्यादा बन गया है। खैर, अब बाजार इस बजट चर्चा और होली की छुट्टी से बाहर निकल कर जब बाकी दुनिया को देखेगा तो उसे विश्व बाजारों में पहले से थोड़ी ज्यादा हरियाली नजर आयेगी। डॉव जोंस ने शुक्रवार को तो मामूली बढ़त दिखायी, लेकिन सोमवार को इसमें अच्छी बढ़त रही। हैंग सेंग आज थोड़ा लाल है, लेकिन इससे पहले कल हमारी होली की छुट्टी के बीच वह 448 अंक उछला था। और इसीलिए आज सुबह सिंगापुर निफ्टी 5000 के दरवाजे पर दिख रहा है। संकेत तो अच्छे हैं! (शेयर मंथन, 02 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 02 March 2010 08:33 )
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