राजीव रंजन झा
जो काम भारत सरकार नहीं कर सकी, वह सरकारी ठेकों पर चलने वाली एक छोटी कंपनी ने कर दिखाया।
एआरएसएस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने अपने आरंभिक पब्लिक इश्यू (आईपीओ) में निवेश करने वाले निवेशकों को बाजार में कदम रखने के पहले दिन 63.62% का शानदार फायदा दे दिया। यह बात ठीक है कि एआरएसएस इन्फ्रा का आईपीओ बंद होने के दिन, यानी 11 फरवरी 2010 की तुलना में अब निफ्टी 261 अंक चढ़ चुका है, बाजार का मनोबल काफी बदला, बढ़ा-चढ़ा दिख रहा है। लेकिन उस समय भी इस आईपीओ ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। तभी इस आईपीओ को 47.6 गुना आवेदन मिले थे। यह हाल के उन गिने-चुने आईपीओ में शामिल है, जिनका आम निवेशकों का कोटा 2-3 गुने से ज्यादा भर पाया। इस आईपीओ को आम निवेशकों के कोटे में 18.5 गुना आवेदन मिले थे। लेकिन इसे लेकर असली उत्साह दिखा था गैर-संस्थागत निजी निवेशकों के बीच, जिन्हें हम बोलचाल में धनी निवेशक या एचएनआई कहते हैं। इस श्रेणी में एआरएसएस के आईपीओ को 124.5 गुना आवेदन मिले थे। संस्थागत निवेशकों की ओर से भी इसमें 49.3 गुना आवेदन आये थे। तो इस छोटी-सी कंपनी ने क्या जादू किया था? सिर्फ इतना, कि इसने अपने शेयर की कीमत का कुछ हिस्सा निवेशकों की झोली में जाने के लिए छोड़ दिया था। बस इतना सा काम, जो हाल में सरकार आम निवेशकों के हितों का ध्यान रखने की सारी बातें करने के बावजूद नहीं कर पा रही है, जबकि विनिवेश का इतना बड़ा कार्यक्रम बाजार के उत्साह पर ही टिका है। बाजार में उत्साह नहीं रहा तो एलआईसी के एटीएम से प्रणव दा कितना पैसा निकालते रहेंगे? जरा देखिए, 450 रुपये के भाव पर एआरएसएस का मूल्यांकन करीब 668 करोड़ रुपये का बन रहा था। आईपीओ बंद होने से लेकर लिस्टिंग के दिन तक कंपनी का मूल्यांकन बढ़ कर 1090 करोड़ रुपये का हो गया। कंपनी ने संयम बरत कर मूल्यांकन का कुछ हिस्सा निवेशकों के लिए छोड़ दिया था। बाजार ने वह मूल्यांकन कंपनी को चंद हफ्तों में दे दिया। लोगों ने बस एक मोटी-सी बात देखी कि यह कंपनी छोटी भले ही हो, लेकिन लगातार अच्छी रफ्तार से बढ़ रही है और अपने क्षेत्र की बाकी कंपनियों के मुकाबले सस्ते मूल्यांकन पर आईपीओ लायी है। मैं इस कंपनी के निवेश लायक होने या नहीं होने पर टिप्पणी नहीं कर रहा। लेकिन इसे लेकर लोगों का जो उत्साह बना, उसे जरूर वित्त मंत्री के लिए एक सबक के रूप में देखा जा सकता है। (शेयर मंथन, 04 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Thursday, 04 March 2010 07:35 )
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