राजीव रंजन झा
गनीमत है कि सरकार ने विनिवेश की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए पिछले झटकों से कुछ तो सीखा।
अच्छी बात यह है कि “अपनी जेब में तो पैसे आ गये ना” वाली सोच को छोड़ कर सरकार ने यह समझा है कि इश्यू निकल जाने के बाद और प्रमोटर या कंपनी की जेब में पैसे आ जाने के बाद भी आगे चल कर शेयर बाजार में उस कंपनी के प्रदर्शन से उसके हितों पर अच्छा या बुरा असर होता है। शायद इसी समझ के चलते सरकार ने एनएमडीसी के सोमवार के 401 रुपये के बाजार भाव की तुलना में इसके फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) में आवेदन का दायरा 300-350 रुपये रखने का फैसला किया है। हालाँकि इन भावों पर भी यह कहा जा सकता है कि एनएमडीसी का शेयर अपने क्षेत्र की बाकी कंपनियों के थोड़ा महँगा है। इश्यू भाव की खबर आने के बाद आज सुबह यह शेयर थोड़ा फिसल कर 378 के पास आ गया है, फिर भी इसका पीई अनुपात बीते 12 महीनों के आधार पर 43.8 का बन रहा है, जबकि इस क्षेत्र का औसत पीई 30 से कम है। विदेशी बाजारों में तो इस क्षेत्र के शेयर और भी कम पीई अनुपात पर चलते हैं। लेकिन एनएमडीसी को अपने बेहतर कामकाज के लिए जरूर थोड़ा ज्यादा मूल्यांकन दिया जा सकता है। कंपनी सबसे लागत पर लौह अयस्क (आयरन ओर) निकालती है। कंपनी प्रबंधन का दावा रहा है कि उसके खनिज भंडार दूसरी कंपनियों से बेहतर हैं। साथ ही उसके पास मौजूद कुल खनिज भंडार का अनुमान हाल में बढ़ता ही दिखा है। इन दावों पर जरूर निवेशक कुछ गौर करेंगे। कंपनी अब आयरन ओर उत्पादन से आगे बढ़ कर नये इस्पात संयंत्र (स्टील प्लांट) भी लगाने जा रही है। खबरें हैं कि यह ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और खाद क्षेत्र में भी कदम रखने जा रही है। इन नये कारोबारों में जाना उसके मौजूदा कामकाज से तालमेल तो रखता है, लेकिन साथ ही इसके अपने जोखिम भी हैं। यह देश की सबसे बड़ी खनिज कंपनी है और अच्छा काम कर रही है। लेकिन काफी बड़ी पूँजी की जरूरत वाले इन नये क्षेत्रों में जाकर वह कितनी कामयाबी हासिल कर सकेगी, यह केवल अंदाजा लगाने वाली बात है। मोटी बात यह है कि इस एफपीओ की कीमत कुछ राहत देती है, लेकिन टूट पड़ने वाली कोई बात भी नहीं है। वैसे बाजार की प्रतिक्रिया पिछले सरकारी इश्युओं के मुकाबले जरूर बेहतर रहेगी। (शेयर मंथन, 09 मार्च 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 09 March 2010 10:05 )
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