राजीव रंजन झा
यूरोपीय बैंकों के स्ट्रेस टेस्ट के जो नतीजे आये हैं, उनके हिसाब से बाजार को काफी खुश होना चाहिए था लेकिन ऐसा कोई खास उत्साह बाजार में दिखा नहीं।
कुल 91 में से केवल 7 बैंक ही इस परीक्षण में नाकाम रहे। केवल स्पेन ही ऐसा देश है, जिसके ज्यादा बैंक इस परीक्षण में असफल रहे। तो नतीजा यह निकलना चाहिए था कि चलो अगर यूरोप में आर्थिक संकट गहराता भी है तो इसके बैंकिंग तंत्र के ढह जाने का खतरा नहीं रहेगा। स्ट्रेस टेस्ट (दबाव परीक्षण) में यही जाँचा जाता है कि सबसे बुरी स्थितियों में उस बैंक के पास पर्याप्त पूँजी बाकी बची रहेगी या नहीं, वह उस संकट को झेल सकेगा या नहीं। लेकिन इस परीक्षण के नतीजे सामने आने से पहले इसके जो पैमाने सामने रखे गये, उनसे बाजार में यह धारणा बनी कि पैमाने काफी हल्के रखे गये थे। यूरोप में असली चिंता सॉवरेन डिफॉल्ट, यानी सरकारी कर्जों के डूबने को लेकर है। खुद सरकार बांड वगैरह जारी करके बाजार से जो पैसा जुटाती है, वैसे सरकारी कर्जों को आम तौर पर सबसे सुरक्षित माना जाता है। वह पैसा निवेशक को नियत ब्याज के साथ वापस मिलेगा, यह वादा सरकार का होता है। लेकिन यूरोप में खतरा यही पैदा हो गया कि खुद सरकारें अपने इन वादों को नहीं निभा सकेंगीं। इसी वजह से हाल में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष को यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, जैसे जर्मनी को साथ में लेकर यूरोप के कमजोर देशों को आर्थिक सहारा देना पड़ा। ग्रीस, स्पेन, पुर्तगाल जैसे देशों के बारे में यह चिंता बनी थी कि अगर कहीं इन देशों की सरकारों ने अपने कर्जों को समय पर चुकाने से हाथ खड़े कर दिये, तो उनका पूरा बैंकिंग तंत्र तबाह हो जायेगा और इसका चक्रीय असर पूरे यूरोप को अपनी चपेट में ले लेगा। लेकिन यूरोपीय बैंकों का जो स्ट्रेस टेस्ट (दबाव परीक्षण) किया गया, उनमें सरकारी कर्जों के बड़े हिस्से के डूबने की संभावना को परखा ही नहीं गया। तो इस परीक्षण का मतलब यह निकलता है कि सामान्य दबाव की स्थिति को ज्यादातर यूरोपीय बैंक झेल जायेंगे। लेकिन अगर कहीं सरकारी कर्जों के डूबने की नौबत आयी, तब इन बैंकों का क्या हाल होगा, इसका कुछ पता नहीं। यानी बाजार की असली चिंता पर अनिश्चितता अभी कायम है। यह अनिश्चितता बाजार को कभी रास नहीं आती। इसीलिए दबाव परीक्षण के नतीजे सामने आने पर अमेरिकी बाजार में कोई उत्साह नहीं दिखा। उत्साह तो बाद में तब आया, जब वहाँ जीई और वेरिजोन जैसी दिग्गज कंपनियों के अच्छे नतीजे सामने आये। खैर, इतनी तो राहत मिली है कि परीक्षण के नतीजे बुरे नहीं है। (शेयर मंथन, 26 जुलाई 2010) |
|
Last Updated ( Monday, 26 July 2010 10:01 )
|