
राजीव रंजन झा मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनी के लिए एक साथ पूरे बाजार की राय बदल जाने की ऐसी मिसाल पहले नहीं दिखी।
क्या मुनाफा 20% घट जाने के चलते ऐसा हो गया? या फिर मार्जिन में कमी को देख कर ब्रोकिंग फर्मों की रिपोर्ट में अचानक इसकी रेटिंग घटा दी गयी? कंपनी का मार्जिन तो बीते 2-3 सालों में कभी 8% तो कभी 15% होता रहा है। इसलिए मुझे लगता है कि इन सब बातों से ज्यादा असर उस झटके का रहा, जो कंपनी ने रॉयल्टी के मुद्दे पर बाजार को दिया। बदले में बाजार ने 1 ही दिन में मारुति के शेयर को 12.5% का झटका दे दिया। और यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि रॉयल्टी बढ़ने का असर कंपनी के मार्जिन पर कितना है। दरअसल सच छिपाने की सजा मिली है मारुति को। इडेलवाइज सिक्योरिटीज ने मारुति सुजुकी की कारों पर सुजुकी की रॉयल्टी शुद्ध बिक्री के 3.6% से बढ़ कर 5.1% हो जाने को पूरी तरह चौंकाने वाला बताया है। एनाम की रिपोर्ट में भी रॉयल्टी को ही रेटिंग को घटाने का मुख्य कारण बताया गया। प्रभुदास लीलाधर की रिपोर्ट में भी इसी पहलू को सबसे ऊपर रखा गया। एमके ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रॉयल्टी में अचानक आये बदलाव ने कंपनी के मजबूत कामकाजी प्रदर्शन को ढक दिया है। विदेशी निवेशकों और ब्रोकिंग फर्मों ने भी इस मुद्दे पर इतनी ही तीखी प्रतिक्रिया दी। नोमुरा ने इसे बेचने की सलाह देकर 1062 रुपये का लक्ष्य भाव बताया। गोल्डमैन सैक्स ने भी 1126 के लक्ष्य भाव के साथ बिकवाली की सलाह दी। हालाँकि सिटी की रिपोर्ट में लक्ष्य भाव घटने के बाद भी 1435 रुपये पर और यूबीएस की रिपोर्ट में 1550 रुपये पर है, लेकिन उन्होंने भी कंपनी की रेटिंग घटायी है। शायद कंपनी को अंदाजा नहीं था कि इस मुद्दे पर बाजार की प्रतिक्रिया इतनी तीखी होगी। यह सोच कर जरा हैरानी होती है कि कंपनी ने इस बारे में बाजार को पहले से जरा सावधान कर देने के बदले इतनी चुप्पी रखी। अगर कंपनी ने समय पर निवेशकों को बताया होता कि मूल कंपनी सुजुकी को दी जाने वाली रॉयल्टी बढ़ने जा रही है, तो बाजार इस बात के लिए पहले से तैयार होता। तब शायद बाजार की प्रतिक्रिया इतनी नकारात्मक भी नहीं होती। दरअसल लक्ष्य भावों में यह कटौती कंपनी के ऊपर निवेशकों का भरोसा घटने के कारण ज्यादा है। लोग बस इस बात पर हैरान हैं कि मारुति ने ऐसी बात कैसे छिपाये रखी! किसी कंपनी के मूल्यांकन में कुछ अंक उस पर निवेशकों के विश्वास और उसके कामकाज में पारदर्शिता के आधार पर भी होते हैं। मारुति के खाते में से इन बातों के कुछ अंक काट लिये हैं बाजार ने। (शेयर मंथन, 27 जुलाई 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 27 July 2010 11:42 )
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