राजीव रंजन झा
बाजार में कई लोग पुकार मचा रहे हैं कि हे रिलायंस के शेयर, अपनी कुंभकर्णी नींद से जागो। लेकिन हकीकत में यह शेयर सोया नहीं है, बल्कि शायद किसी बड़ी चाल के लिए तैयार हो रहा है।
लेकिन यह चाल किधर होगी – ऊपर या नीचे? फिलहाल ऐसा दिखता है कि यह खतरे के निशान के नीचे आ गया है। नदी का पानी खतरे के निशान के नीचे रहना अच्छा होता है, लेकिन शेयर का भाव खतरे के निशान के नीचे आने पर बड़ी गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है। रिलायंस के नीचे दिये चार्ट को देखें।
इसमें जुलाई 2009, नवंबर 2009 और मई 2010 की तलहटियों को छूती नीली रेखा कट चुकी है। यह रुझान रेखा 4 दिन पहले 5 अगस्त को 1000 के कुछ ऊपर कटी है। इसके बाद से रिलायंस लगातार नीचे ही आया है। मतलब यह रिलायंस को सहारा देने वाली एक प्रमुख रुझान रेखा ठीक तरह से कट चुकी है। अब इस चार्ट में बनी दो लाल रेखाओं को देखें। ऊपरी लाल रेखा अभी करीब 1000 के पास ही है। इसी रेखा पर रिलायंस को पिछले साल डेढ़ साल में कई बार सहारा मिला है। दरअसल ये दोनों लाल रेखाएँ एक ऐसी पट्टी बना रही हैं, जिसके बीच में रिलायंस को ढेर सारे स्तरों पर बार-बार सहारा मिला है। इस चार्ट में खास बात यह दिखती है कि इस पट्टी के अंदर सहारा लेने के बाद रिलायंस बार-बार तेजी से ऊपर गया है, भले ही ऊपर जा कर 1100-1150 के आसपास अटक गया हो। रिलायंस के लिए डराने वाली एक और बात यह है कि अब यह शेयर अपने 5 दिनों से लेकर 200 दिनों तक के सारे सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) और एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) स्तरों के नीचे आ गया है। तो इन सब बातों का मतलब क्या निकलता है? पहली संभावना यह है कि रिलायंस 900 रुपये के ऊपर के किसी भी स्तर से सहारा लेकर तेजी से वापस ऊपर पलटे। दूसरी संभावना यह है कि 900 रुपये के भी नीचे चला जाये और कोई बड़ी गिरावट देखे। मेरा मन पहली संभावना के साथ है, लेकिन हो सकता है कि ऐसा करने से पहले यह आपको कुछ डराये छकाये। (शेयर मंथन, 11 अगस्त 2010) |
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Last Updated ( Wednesday, 11 August 2010 10:26 )
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