Home राग बाजारी भाग्यश्री लीजिंग: भला क्यों शेयर बाजार में है यह?
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भाग्यश्री लीजिंग: भला क्यों शेयर बाजार में है यह? Print E-mail

राजीव रंजन झा

बस यूँ ही नजर पड़ गयी इस नाम पर – दरअसल देख रहा था कि बाजार में थोड़ी कमजोरी के बीच भी कौन-से शेयर कल मजबूत बने रहे।

ए, बी श्रेणियों के शेयरों को देखते-देखते जेड श्रेणी की भी टेबल देख ली, तो यह नाम सामने आया – 5% ऊपरी सर्किट के साथ। तो बस यही एक कारण था कि इस शेयर पर नजर पड़ गयी। वरना इस शेयर को देखने या इसमें कोई निवेश करने का कारण तो छोड़ दें, मुझे तो इसी बात पर अचरज है कि यह कंपनी भला शेयर बाजार में है ही क्यों? इसमें आम तौर पर कोई सौदा नहीं होता। इस महीने कभी 1 तो कभी 2 सौदे ही दिखे। पूरे जुलाई में इसमें 1 भी सौदा नहीं हो पाया। लेकिन यही 1-2 सौदे इसे सर्किट पर ले जाते हैं - कभी ऊपरी सर्किट तो कभी निचले सर्किट पर।
कंपनी का नाम बताता है कि यह लीजिंग और फाइनेंस का काम करती है। लेकिन हकीकत में यह कोई कामकाज नहीं करती। इसके ताजा नतीजे बताते हैं कि अप्रैल-जून 2010 की तिमाही में इसकी आमदनी शून्य थी। और इससे पिछले साल की इसी तिमाही में भी कंपनी ने कुछ नहीं कमाया था। अगर पूरे कारोबारी साल 2009-10 को देखें, तब भी इसकी कुल आमदनी केवल 2.40 लाख रुपये थी। कंपनी के पास कोई कर्मचारी भी नहीं है, क्योंकि कर्मचारियों के वेतन पर कंपनी का खर्च शून्य ही है। शायद इसीलिए कंपनी ने एक्सचेंज को अपने तिमाही नतीजे का फैक्स भेजने के लिए भी किसी कुमार प्रॉपर्टीज की मदद ली! वैसे कुमार प्रॉपर्टीज का फैक्स नंबर केवल के जैन के नाम पर है जो इस कंपनी के प्रमोटर हैं। तो शायद मतलब यह है कि जैन साहब इस लीजिंग और फाइनेंस कंपनी को चलाने के बदले प्रॉपर्टी के काम में ही लगे हैं।
इस कंपनी के प्रमोटरों के खाते में घोषित रूप से 84.04% शेयर हैं। जनता के नाम पर जो शेयर हैं, उनमें से भी 11.85% शेयर दो प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के नाम पर हैं, जिनके नाम से लगता है कि उनका ताल्लुक जमीन-जायदाद के काम से ही है।
कंपनी कामकाज करे या न करे, इसमें सौदे हों या न हों, लेकिन इसका शेयर भाव जरूर चलता रहता है। साल 2007-08 से अब तक कभी कंपनी की तिमाही आमदनी 4-6 लाख रुपये से ज्यादा नहीं रही, लेकिन इसका शेयर भाव मार्च 2007 के 13 रुपये से चढ़ कर दिसंबर 2007 में 182 रुपये तक गया, और फिर अप्रैल 2009 में 21 रुपये तक लौट आया। इसके बाद यह बढ़ते-बढ़ते दिसंबर 2009 में 384 रुपये तक चला गया और अब अगस्त 2010 में 114 तक फिसलने के बाद अब 139.65 रुपये पर है।
क्या कोई बता सकता है कि आखिर यह कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध क्यों है? भले ही यह बीएसई की जेड श्रेणी में हो, लेकिन है ही क्यों? (शेयर मंथन, 25 अगस्त 2010)

Last Updated ( Wednesday, 25 August 2010 08:01 )
 

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